संतप्त किसानों ने MPCB कार्यालय पर फेंका कीचड़, प्रदूषण से 100 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने का दावा

Chandrapur Pollution: चंद्रपुर के घुग्घुस में लॉयड मेटल्स से कथित प्रदूषण के खिलाफ किसानों ने MPCB कार्यालय पर कीचड़ फेंककर विरोध जताया। 100 एकड़ खेती प्रभावित होने का दावा किया।
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लॉयड मेटल्स प्रदूषण (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Farmers Protest Chandrapur: चंद्रपुर जिले के घुग्घुस स्थित मे। लॉयड् मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड से कथित रासायनिक एवं वायु प्रदूषण के खिलाफ किसानों का आक्रोश सामने आया है। उसगांव क्षेत्र की करीब 100 एकड़ कृषि भूमि प्रदूषण से प्रभावित होकर बर्बादी की कगार पर पहुंचने का आरोप लगाते हुए किसानों ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) के चंद्रपुर कार्यालय पर कीचड़ फेंककर तीखा विरोध दर्ज कराया।

किसानों का आरोप है कि लंबे समय से प्रदूषण की समस्या के बावजूद प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी के विरोध में किसानों ने MPCB कार्यालय पहुंचकर अपना आक्रोश जताया और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

100 एकड़ खेती प्रभावित होने का दावा

घुग्घुस स्थित लॉयड् मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड से कथित रासायनिक एवं वायु प्रदूषण के कारण उसगांव क्षेत्र की करीब 100 एकड़ कृषि भूमि और फसलों को नुकसान होने का आरोप किसानों ने लगाया। किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और 5 नुकसान की भरपाई की मांग की। किसानों के अनुसार, कारखाने से निकलने वाले रासायनिक द्रव्य और कचरे के कारण क्षेत्र के नाले का पानी प्रदूषित हो गया है।

यही पानी आगे वर्धा नदी में मिल रहा है, जिससे पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा होने का दावा है। इसलिए करीब 100 एकड़ प्रभावित कृषि भूमि की जांच, फसलों के नुकसान का पंचनामा आदि की उनकी मांगे है। MPCB अधिकारियों पर मिलीभगत का गंभीर आरोप भी किसानों ने लगाया है। किसान मोहनदास राजुरकर ने बताया कि अधिकारी नियमोल्लंघन की अनदेखी कर रहे है।

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समस्या के समाधान की चुनौती

प्रदूषण की समस्या का तत्काल समाधान नहीं होने पर किसानों ने 25 अगस्त को आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। इस चेतावनी के बाद प्रशासन के सामने किसानों की समस्या के तत्काल समाधान की चुनौती खड़ी हो गई है।

अधिकारियों ने टिप्पणी से किया इनकार

मामले में MPCB के संबंधित अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने बयान देने से इनकार कर दिया। किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों पर विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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