

Highlights:
समस्त फाइनेंस कर्मचारी संगठन ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा।
संगठन का दावा है कि कर्ज वसूली के दौरान कर्मचारियों को मारपीट, धमकी और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों पर होने वाले हमलों और धमकियों को रोकने के लिए पुलिस सुरक्षा तथा कानूनी सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की गई।
Yavatmal Finance Employees Protest: महाराष्ट्र में फाइनेंस क्षेत्र में कार्यरत हजारों कर्मचारियों के रोजगार, सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। कर्ज वसूली की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों को मारपीट, धमकियों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, सूखे की स्थिति को लेकर कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा दिए गए बयानों के कारण फाइनेंस कर्मचारियों के प्रति लोगों में गलतफहमियां और आक्रोश पैदा हो रहा है। ऐसा आरोप समस्त फाइनेंस कर्मचारी संगठन ने लगाया है।
इस गंभीर समस्या की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए संगठन की ओर से यवतमाल जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि सूखे के कारण आर्थिक संकट में फंसे किसानों को कर्ज की किस्तें चुकाने में छूट या स्थगन दिया जाता है, तो इसी अवधि में बिजली, गैस और पेट्रोल जैसी आवश्यक सेवाओं में भी किसानों को राहत देने पर विचार किया जाना चाहिए।
संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर कर्ज वसूली के दौरान संपत्तियों के ताले तोड़ने, अनधिकृत रूप से प्रवेश करने तथा कर्मचारियों को धमकाकर वसूली प्रक्रिया में बाधा डालने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कर्मचारियों को पुलिस सुरक्षा और कानूनी सहयोग उपलब्ध कराया जाए, कर्मचारियों पर होने वाले हमलों और धमकियों की शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच की जाए, ऐसी मांग भी ज्ञापन में की गई है। सचिन आगलावे, अमोल ढोणे, उमेश चव्हाण, विनोद राठोड, नितीन त्रिवेदी, आसिफ अली, पराग सुले, प्रशांत तुराले, अभय राकेश, अमिताभ हातागडे, निलेश सावले, पंकज जयस्वाल, सागर गावंडे, समीर इंगले, राहुल फटिंग, प्रवीण गुधाने, कुणाल गोगटे, ज्ञानदीप गवली और सतीश बिजवे के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया।
फाइनेंस क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी सामान्य और किसान परिवारों से आते हैं। उनके वेतन पर ही उनके परिवारों का गुजारा निर्भर है। संगठन का कहना है कि कुछ राजनीतिक नेताओं के बयानों के कारण नागरिकों में फाइनेंस क्षेत्र को लेकर गलतफहमियां पैदा हो रही हैं और इसका खामियाजा प्रत्यक्ष रूप से काम करने वाले कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। फाइनेंस क्षेत्र के कर्मचारी भी किसान परिवारों से ही आते हैं। इसलिए किसानों और फाइनेंस कर्मचारियों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा करने के बजाय दोनों पक्षों की समस्याओं को समझने की आवश्यकता है।