किसान दंपति ने की आत्महत्या : पति की मौत के 24 घंटे बाद पत्नी ने भी कुएं में कूदकर दी जान
Yavatmal News: यवतमाल के भवानी गांव में किसान पति की आत्महत्या के गम में पत्नी ने भी मौत को गले लगा लिया। 24 घंटे के भीतर हुई इस दोहरी आत्महत्या से पूरे इलाके में शोक की लहर है। पढ़ें पूरी खबर।
- Written By: आकाश मसने
किसान आत्महत्या (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Yavatmal Farmer couple suicide News: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के दराटी पुलिस थाना अंतर्गत आने वाले भवानी गांव में एक बेहद दुखद और हृदय विदारक घटना सामने आई है। यहाँ एक किसान दंपति ने महज 24 घंटे के अंतराल में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पति द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम के गम में पत्नी ने भी उसी कुएं में कूदकर जान दे दी, जहां पति का शव मिला था। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
कुएं में मिला किसान का शव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 50 वर्षीय किसान अशोक दत्ता कुंटलवार शनिवार (20 दिसंबर) की सुबह रोजाना की तरह घर से खेत के लिए निकले थे। दोपहर तक वापस न लौटने पर परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। काफी तलाश के बाद गांव के ही एक खेत के कुएं में अशोक का शव तैरता हुआ मिला। पुलिस ने शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, लेकिन परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटना अभी बाकी था।
सदमे में पत्नी ने भी दी जान
पति की मौत से उनकी 45 वर्षीय पत्नी सविता अशोक कुंटलवार गहरे सदमे में थीं। परिवार अभी अशोक के अंतिम संस्कार और शोक से उबर भी नहीं पाया था कि रविवार को सविता ने भी उसी रास्ते पर चलने का फैसला किया। उन्होंने भी उसी कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी। एक ही परिवार में दो दिनों के भीतर हुई इन दो मौतों से कुंटलवार परिवार पूरी तरह बिखर गया है और पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
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कर्ज और आर्थिक तंगी की आशंका
हालांकि पुलिस की ओर से आत्महत्या के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि मृतक किसान कर्ज और खेती में हो रहे नुकसान के कारण काफी समय से मानसिक दबाव में थे। आय की अनिश्चितता और बढ़ता आर्थिक बोझ अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आत्मघाती कदमों का कारण बनता है।
दराटी पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या दंपति पर किसी निजी साहूकार या बैंक का दबाव था। इस घटना ने एक बार फिर किसानों की दयनीय स्थिति और उनके मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
