

Yavatmal Crop Protection From Wild Animals: यवतमाल जिले के वणी विधानसभा क्षेत्र के वणी, मारेगांव और झरी-जामनी तहसील के किसानों को वन्य प्राणियों से होने वाले फसल नुकसान से राहत दिलाने के उद्देश्य से खनिज निधि के तहत सोलर सायरन का वितरण किया गया। करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से 3500 किसानों को सोलर सायरन उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसका वितरण वणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय देरकर के हाथों किया गया।
इस योजना के लिए किसानों के आवेदन ऑनलाइन भरने की प्रक्रिया माहिम नामक संस्था को सौंपी गई थी। इसमें कृषि तंत्रज्ञान व्यवस्थापन यंत्रणा (आत्मा), यवतमाल तथा कृषि उन्नति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, यवतमाल का योगदान बताया गया है। हालांकि, सोलर सायरन यंत्रों के वितरण के दौरान वाटप प्रक्रिया में तकनीकी समस्या आने से वणी, मारेगांव और झरी-जामनी क्षेत्र के कई किसान सोलर सायरन प्राप्त किए बिना ही वापस लौट गए।
वहीं, अनेक किसानों को इस योजना की पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने के कारण वे आवेदन या लाभ लेने से वंचित रह गए, बताया जाता है कि एक सोलर सायरन यंत्र की कीमत लगभग 8 - हजार रुपए है। वन्य प्राणियों से फसलों की रक्षा के लिए यह योजना किसानों के लिए उपयोगी मानी जा रही है। ऐसे में योजना से वंचित किसानों को भी विधायक संजय दरकर इसका लाभ दिलाएंगे क्या, यह सवाल किसान वर्ग की ओर से उठाया जा रहा है।
विधायक संजय देरकर ने कहा कि वणी विधानसभा क्षेत्र के तीनों तहसीलों का ज्यादातर हिस्सा जंगलों से सटा हुआ है जिस वजह से क्षेत्र के किसानों की फसल वन्य प्राणी नष्ट कर किसानों का आर्थिक नुकसान करते है इस उद्देश्य से खनिज विकास निधि के तहत मैं ने यह फंड लाकर यह सोलर सायरन यंत्र का वितरण किया है।
वहीं, सोलर सायरन वितरण कार्यक्रम में सांसद प्रतिभा धानोरकर का प्रोटोकॉल के अनुसार नाम नहीं होने की बात सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा शुरू हो गई है। खनिज निधि से संचालित इस योजना के कार्यक्रम में सांसद का नाम और भूमिका क्यों नहीं दिखाई दी, इसे लेकर स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं। अब योजना से वंचित किसानों को दोबारा सोलर सायरन उपलब्ध कराया जाएगा या नहीं और किसानों की शिकायतों का समाधान किस तरह किया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।