आखिर कब थमेगा किसानों की मौत का सिलसिला? यवतमाल में 31 दिनों में 21 ने की आत्महत्या, कृषि नीति पर उठे सवाल

Yavatmal Farmers Suicide News: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में कर्ज और फसल बर्बादी के चलते जनवरी में 21 किसानों ने जान दे दी। कृषि संकट और सरकारी राहत पैकेजों की विफलता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
In Yavatmal 21 farmers committed suicide in January
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Yavatmal Farmer Death News: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। साल 2026 की शुरुआत ही किसानों के लिए काल बनकर आई है, जहाँ अकेले जनवरी महीने में ही 21 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। यह आधिकारिक पुष्टि जिला कलेक्टर विकास मीणा ने की है।

पैकेज दर पैकेज, फिर भी मौत का तांडव जारी

राज्य सरकार के वसंतराव नायक शेती स्वावलंबन मिशन (वीएनएसएसएम) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ कार्यकर्ता किशोर तिवारी ने इस संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार पर कृषि संकट से निपटने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया। तिवारी ने उन किसानों की आधिकारिक सूची साझा की है जिन्होंने पिछले महीने मौत को गले लगाया। तिवारी के अनुसार, पश्चिमी विदर्भ जो मुख्य रूप से कपास और सोयाबीन के उत्पादन के लिए जाना जाता है। 1998 से ही किसानों की आत्महत्या का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे केंद्र में यूपीए की सरकार रही हो या एनडीए की, कृषि राहत के नाम पर दिए गए करोड़ों के पैकेज बुनियादी समस्याओं को सुलझाने में नाकाम रहे हैं।

क्या हैं किसानों की मुख्य समस्याएं?

विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल ऋण माफी समस्या का समाधान नहीं है। किसानों को निम्नलिखित मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

  • सिंचाई की कमी: मानसून पर अत्यधिक निर्भरता।
  • मिट्टी की गुणवत्ता: लगातार घटती उर्वरता और बढ़ती लागत।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): उपज का सही दाम न मिलना।
  • भंडारण की कमी: स्थानीय स्तर पर कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स का अभाव।

किशोर तिवारी ने सुझाव दिया कि सरकार को बार-बार ऋण माफी देने के बजाय एक दीर्घकालिक ऋण नीति बनानी चाहिए। साथ ही, किसानों को नकदी फसलों (Cash Crops) के बजाय मोटे अनाज (Millets) और दालों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकें।

प्रशासन का पक्ष: मिशन उभारी

दूसरी ओर, यवतमाल जिले के कलेक्टर विकास मीणा ने कहा कि प्रशासन हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है। राज्य सरकार द्वारा संचालित 'मिशन उभारी अभियान' के माध्यम से पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और आत्महत्या रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। मीणा ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता के डिमांड ड्राफ्ट और सरकारी योजनाओं के प्रमाणपत्र वितरित किए हैं। हालांकि, धरातल पर बढ़ते मौत के आंकड़े इन दावों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

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