

Yavatmal Water Crisis: हर वर्ष की तरह इस बार भी गर्मी बढ़ते ही यवतमाल जिले में पानी की किल्लत गहराने लगी है। अप्रैल, मई और जून महीने में जिले को नियमित रूप से जलसंकट का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से जलाशयों का पानी तेजी से वाष्पित हो रहा है, जिसके कारण जिले में पानी की कमी के असर दिखाई देने लगे हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल सात तहसीलों में 21 टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति शुरू की है।
साथ ही 107 गांवों के लिए 100 निजी कुओं और 11 बोरवेल का अधिग्रहण किया गया है। वर्तमान में करीब 30 हजार 343 लोगों को टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। सबसे अधिक संकट पुसद तहसील के मालपठार क्षेत्र में देखा जा रहा है।
यहां सात गांवों में 7 टैंकरों के जरिए 12 फेरों में पानी पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा आर्णी तहसील के कारेगांव पारधी बेड़ा, पालोदी, ईचोरा, दहेली और सुधाकरनगर, यवतमाल तहसील के पांढरी, किटा और निंबर्डी, घाटंजी तहसील के पांढुर्णा और इंझाला पारधी बेड़ा, नेर तहसील के आर्जती, बाभुलगाव तहसील के सारफली तथा दारव्हा तहसील के करजगांव में भी टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जलसमस्या दूर करने के लिए अब तक करोड़ों रुपये खर्च कर विभिन्न योजनाएं चलाई गई, लेकिन हर गर्मी में जलसंकट फिर से गंभीर रूप ले लेता है।
पुसद तहसील के मालपठार क्षेत्र के 42 गांवों में हर साल पानी की भारी कमी रहती है। इस वर्ष भी शुरुआत में येलदरी, बुटी और कारला गांवों में पानी की समस्या सामने आई, जिसके बाद अब संकट बढ़ता जा रहा है और सात गांवों में टैंकरों से जलापूर्ति करनी पड़ रही है।