

Yavatmal Rural Water Supply: यवतमाल जिले में नेर तहसील के ग्राम आजंती पारधी बस्ती की 9 वर्षीय अन्वी अडाणी भोसले की मृत्यु के बाद पानी की समस्या गंभीर मुद्दा बन गई है। जल जीवन मिशन के तहत गांव को दो बार फंड मंजूर होने के बावजूद नागरिकों को नियमित पानी नहीं मिल रहा है, जिससे लोगों में आक्रोश है। प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं।
अन्वी की मौत के बाद प्रशासन ने मेडिकल कारणों पर जोर देते हुए इसे पानी से जुड़ी मौत मानने से इनकार किया है, लेकिन हकीकत यह है कि बस्ती में 10 से 12 दिनों में केवल एक बार पानी आता है। इसके कारण महिलाओं से लेकर छोटे बच्चों तक सभी को रोज पानी के लिए भटकना पड़ता है।
घटना के बाद अधिकारियों ने गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया, लेकिन स्थानीय नागरिक इसे केवल दिखावा बता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों पर फंड आया और काम पूरे दिखाए गए, लेकिन नलों में पानी नहीं पहुंचा।
वहीं, विभिन्न विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने का सिलसिला जारी है। पानी आपूर्ति योजनाएं क्यों अधूरी रहीं और फंड का उपयोग कहां हुआ, इस पर अब तक कोई स्पष्ट रिपोर्ट सामने नहीं आई है। अन्वी की मौत के बाद भी वस्ती की पानी समस्या पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। अब स्थायी जलापूर्ति शुरू करने की मांग जोर पकड़ रही है।
किसी भी समस्या का समय पर समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। लेकिन अक्सर समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है। जब कोई घटना होती है, तभी प्रशासन सक्रिय होता है और दौरे, बैठकें व समीक्षा शुरू होती है।
आर्जती मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। यदि अन्वी की मौत के बाद भी नल सूखे ही रहेंगे, तो योजनाएं आखिर किसके लिए हैं, ऐसा सवाल नागरिक उठा रहे हैं। 10 से 12 दिनों में केवल एक बार पानी समस्या आने की सच्चाई सामने आई।