

Rajiv Khobragade Social Worker: ईरान-अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव का असर आम लोगों पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान कुवैत में फंसे आठ भारतीय नागरिकों के लिए प्रशासनिक मदद का इंतजार किए बिना इंसानियत आगे आई। नागपुर के ‘द प्लेटफॉर्म’ संगठन के आह्वान पर कुवैत, रियाद और भारत के लोगों के सहयोग से इन संकटग्रस्त परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में यवतमाल के अमित कांबले ने हेल्पलाइन के जरिए लगातार समन्वय बनाए रखा। जैसे ही ‘द प्लेटफॉर्म’ के सामाजिक कार्यकर्ता राजीव खोब्रागड़े को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत मदद के प्रयास शुरू किए। उन्होंने कुवैत, रियाद और भारत में अपने नेटवर्क के माध्यम से सहयोग जुटाया। कुवैत में फंसे लोगों के लिए राजकुमार तिरपुडे, नरेंद्र डोंगरे और एमएमके संगठन के सदस्यों ने भोजन की व्यवस्था की।
वहीं रियाद में संपर्क स्थापित करने के लिए नागपुर की उर्वशी चारभे ने पहल की। गौरव रामटेके लगातार इन परिवारों के संपर्क में रहे। उन्होंने देवेंद्र भंगाले के साथ समन्वय कर पीड़ितों को सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाया। सऊदी अरब में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता अमित मेश्राम और संजय सामंत ने छात्र की मदद की।
दुबई में फंसी महिला के लिए ‘द प्लेटफॉर्म’ ने फ्लाइट की व्यवस्था की, जिसका टिकट अमित बोरकर ने बुक किया और उनके भारत पहुंचने तक संपर्क में रहे। इस पूरे अभियान में साहिल शेख, मित्र स्वयंमदीप, अतुल पंचभाई, लुंबिनी राजीव खोब्रागड़े और यवतमाल के अमित कांबले ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 11 मार्च को एक छात्र सुरक्षित पहुंचा, जबकि 14 और 15 मार्च को महाराष्ट्र और केरल के तीन-तीन लोग रियाद पहुंचे।
युद्ध जैसी स्थिति में विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। हालांकि अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर ‘द प्लेटफॉर्म’ ने स्वयं आगे बढ़कर मदद की। संगठन के राजीव खोब्रागड़े ने अपील की है कि खाड़ी देशों में यदि कोई भारतीय संकट में हो, तो ‘द प्लेटफॉर्म’ से संपर्क करे।