ग्रामीण मज़दूर रोज़ी-रोटी के लिए कर रहे पलायन, गांव-गांव होते जा रहे हैं बदहाल

Employment Crisis: यवतमाल के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोज़गारी की समस्या सामने आई है। कृषि संकट और औद्योगीकरण की कमी के कारण मजदूरों का बड़े पैमाने पर पलायन जारी है।
ग्रामीण मज़दूर रोज़ी-रोटी के लिए कर रहे पलायन
ग्रामीण मज़दूर रोज़ी-रोटी के लिए कर रहे पलायन (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Yavatmal District: औद्योगीकरण का अभाव, बढ़ती बेरोज़गारी, आय में लगातार गिरावट और प्राकृतिक आपदाओं से कृषि को हो रहे नुकसान के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूर बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। गांव में रोजगार न होने के कारण मजदूर गन्ना कटाई, ईंट भट्ठों पर काम, कपास चुनने जैसे कार्यों के लिए अपने परिवारों के साथ गांव छोड़ रहे हैं।

आगामी स्थानीय निकाय चुनावों पर इस पलायन का सीधा असर पड़ने की आशंका है। पलायन की अवधि सामान्यतः 4 से 6 महीनों की होती है, ऐसे में मतदाताओं को अपने क्षेत्र में रोकना और मतदान के दिन उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा।

दिवाली के बाद पलायन की गति और भी तेज़

दिग्रस तालुका के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र अत्यंत पिछड़े हैं। हर वर्ष सैकड़ों परिवार रोजगार की तलाश में मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र, मुंबई और पुणे की ओर पलायन करते हैं। दिवाली के बाद पलायन की गति और भी तेज़ हो जाती है।

बच्चों की शिक्षा पर गंभीर प्रभाव

औद्योगिक विकास की कमी, कृषि आधारित आय के सीमित साधन और लगातार आर्थिक संकट ने ग्रामीण परिवारों को मजबूर कर दिया है कि वे छह महीनों का गुजारा करने के लिए बाहरी क्षेत्रों में काम तलाशें। मजदूर अपने बच्चों को भी साथ लेकर जाते हैं, जिससे स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घट रही है और बच्चों की शिक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

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