Yavatmal News: पुसद में किसानों का महावितरण के खिलाफ प्रदर्शन, 12 घंटे दिन में बिजली देने की मांग
Pusad MSEDCL Electricity Crisis: पुसद क्षेत्र में महावितरण की लापरवाही से केवल 6 घंटे बिजली मिलने से फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसानों ने दिन में 12 घंटे निर्बाध बिजली देने की मांग की है।
- Written By: केतकी मोडक
पुसद के किसान महावितरण अधिकारियों को ज्ञापन सौंपके हूए (सोर्स - नवभारत)
Farmers Protest Against Mahavitran In Pusad: पहले से ही प्रकृति के बदलते मिजाज और बेमौसम मार से जूझ रहे विदर्भ के अन्नदाताओं पर अब प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही दोहरी मार बनकर टूट रही है। यवतमाल जिले के पुसद क्षेत्र में महावितरण की कथित घोर लापरवाही और लचर बिजली आपूर्ति प्रणाली के कारण स्थानीय किसानों की खेती गहरे संकट में घिर गई है।
किसानों का सीधा और गंभीर आरोप है कि उन्हें दिन भर में केवल 6 घंटे ही बिजली की आपूर्ति की जा रही है। इस नाकाफी बिजली सप्लाई में भी बार-बार लो-वोल्टेज और तकनीकी खराबी आने के कारण खेतों में सिंचाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे खड़ी फसलें पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।
दिन में 12 घंटे बिजली देने की मांग
पूरी मेहनत और पूंजी लगाने के बाद भी बिजली के अभाव में फसलों को बर्बाद होता देख किसानों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। इसी गंभीर समस्या से त्रस्त होकर निंबी, पार्डी, गणेशपुर और कवडीपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के पीड़ित किसानों ने एकजुट होकर पुसद स्थित महावितरण के कार्यकारी अभियंता कार्यालय पर दस्तक दी।
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किसानों ने अपनी बदहाली को बयां करते हुए अधिकारियों को एक कड़क ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने मुख्य रूप से मांग उठाई है कि कृषि पंपों को सुचारू रूप से चलाने के लिए दिन के समय कम से कम 12 घंटे लगातार और निर्बाध (बिना ट्रिपिंग के) बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
लागत निकालना हुआ मुश्किल; किसानों ने दागे तीखे सवाल
ज्ञापन सौंपने पहुंचे किसानों ने महावितरण के रवैये पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में रासायनिक खाद, उन्नत बीज और बुवाई से लेकर कटाई तक की मजदूरी की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में कर्ज लेकर की गई खेती को यदि समय पर पानी नहीं मिला, तो फसलों का नष्ट होना तय है।
किसानों ने कड़े शब्दों में सवाल उठाया कि यदि महावितरण की इस अघोषित बिजली कटौती और पानी की कमी के चलते उनकी फसलें खेतों में ही दम तोड़ देती हैं, तो इस भारी आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन सा अधिकारी या विभाग लेगा?
मांगें पूरी न होने पर महावितरण दफ्तर के बाहर आमरण अनशन का ऐलान
अन्नदाताओं ने महावितरण प्रशासन को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर तुरंत संज्ञान लेकर बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया, तो क्षेत्र के तमाम ग्रामीण और किसान पुसद स्थित महावितरण के मुख्य कार्यालय के सामने बोरिया-बिस्तर लेकर बैठ जाएंगे और उग्र अनिश्चितकालीन धरने के साथ-साथ आमरण अनशन शुरू कर देंगे।
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किसानों की प्रमुख मांगों में कृषि पंपों के लिए दिन में 12 घंटे बिजली देने के अलावा ग्रामीण फीडर और स्थानीय ट्रांसफॉर्मरों में आने वाले तकनीकी फाल्ट को तुरंत ठीक करने के लिए 24 घंटे तकनीकी टीम तैनात करने की मांग शामिल है। साथ ही बिजली गुल रहने से जिन किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, उनके खेतों का तुरंत पंचनामा कराकर सरकार से उचित मुआवजा दिलाने की वकालत भी की गई है।
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान गजानन जाधव, गणेश सावंत, दीपक मोरे, संतोष आंबोरे, अरुण नागुलकर, पंजाबराव ढेकले, मामा जाधव, दिगंबर देशमुख, संतोष अनकुले, रमेश भोणे, रवि मारोटकर, मल्हारी मुले, अजय गरड और किसान मित्र मधुकर चव्हाण सहित भारी संख्या में किसान उपस्थित थे।
