प्रमोद भरवाडे फर्जी केस (सौजन्य-नवभारत)
Pramod Bharwade Exposed: महागांव नगर पंचायत में चल रहे भ्रष्टाचार, अवैध प्रस्तावों और शराब दुकानों की अनुमति को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नगर पंचायत के उपाध्यक्ष प्रमोद उर्फ शाखा भरवाडे द्वारा पूरे परिवार के अपहरण की फर्जी कहानी रचने का खुलासा पुलिस की कड़ी जांच में हो गया है। महज कुछ ही घंटों में यह तथाकथित ‘किडनैपिंग ड्रामा’ पूरी तरह बेनकाब हो गया।
6 फरवरी की रात करीब 2 बजे, अज्ञात लोगों द्वारा बंदूक की नोक पर पूरे परिवार के अपहरण की अफवाह महागांव परिसर में फैलाई गई। इस संबंध में पुलिस थाने में गलत जानकारी दी गई, साथ ही कुछ खास मित्रों को फोन कर भ्रम की स्थिति पैदा की गई। इसके चलते पूरे यवतमाल जिले की पुलिस व्यवस्था अलर्ट मोड पर आ गई। लेकिन जांच के दौरान सच्चाई सामने आ गई।
सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट हुआ कि उपाध्यक्ष प्रमोद भरवाडे स्वयं अपने परिवार के साथ स्विफ्ट डिजायर कार से निकलते हुए दिखाई दिए। बिजोरा टोल नाके पर वे खुद गाड़ी चलाते नजर आए। बाद में वाहन को मानवाड़ी फाटा (हदगांव पुलिस स्टेशन क्षेत्र) में चाबी सहित छोड़ दिया गया था, जबकि पूरा परिवार सीधे ससुराल चला गया था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए उपविभागीय पुलिस अधिकारी हनुमंत गायकवाड, एलसीबी व उनकी टीम महागांव पहुंची। महागांव पुलिस ने तीन अलग-अलग टीमें गठित कर तेज़ी से जांच शुरू की। इसी दौरान उपाध्यक्ष का भाई शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचा, लेकिन कड़ी पूछताछ में उसकी बातों की पोल खुल गई और पूरा फर्जी मामला उजागर हो गया।
खास बात यह है कि इससे पहले भी उपाध्यक्ष के खिलाफ झूठी शिकायत, फर्जी हमला, धमकी और सहानुभूति हासिल करने के लिए किए गए आरोपों का इतिहास पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद है। पुराने रिकॉर्ड खंगालने पर इस तरह की बनावटी घटनाओं का एक पैटर्न सामने आया है।
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उधर, महागांव नगर पंचायत में पहले से ही फर्जी दस्तावेज, अवैध प्रस्ताव, भ्रष्टाचार और शराब दुकानों की गैरकानूनी अनुमति को लेकर माहौल गर्म है। वार्ड क्रमांक 1 और 17 की देसी शराब दुकानें बंद करने के प्रस्ताव की हलचल के बीच यह ‘किडनैपिंग ड्रामा’ रचा गया, जिसकी शहर में जोरदार चर्चा है।
इस पूरे मामले में पुलिस तंत्र को गुमराह कर बेवजह अलर्ट पर लाया गया, जो एक गंभीर अपराध है। वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि झूठी शिकायत और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ जल्द ही आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे। फिलहाल महागांव में विकास की बजाय नाटक, ड्रामा और फिल्मी राजनीति की चर्चा हर चौक-चौराहे पर हो रही है।