मणिपुर की घटना ने पूरे देश को दुनिया में शर्मसार किया, शिवाजीराव मोघे की पत्रकार परिषद में जानकारी
- Written By: नवभारत डेस्क
यवतमाल. मणिपुर की घटना ने पूरे देश को दुनिया में शर्मसार कर दिया है, लेकिन केंद्र और वहां की स्थानीय राज्य सरकार अब भी बेपरवाह हैं. मणिपुर की घटना का कांग्रेस की ओर से निषेध जताया जा रहा है. इस आशय की जानकारी अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवाजीराव मोघे ने पत्रकार परिषद में दी.
विश्रामगृह में बुलाई गई पत्रकार परिषद में शिवाजीराव मोघे ने बताया कि मणिपुर राज्य में तीन महिलाओं को निर्वस्त्र कर उनके कपड़े उतार दिए गए. इससे पूरे देश को दुनिया के सामने में शर्मसार होना पड़ा. जबकि यह मामला है, यह बहुत क्रोधित करने वाला है. बावजूद इसके केंद्र सरकार या मणिपुर में भाजपा सरकार इस मामले को एक साधारण अपराध मान रही है. यह घटना 4 मई को कांगपोकपी जिले के बी फिनिम गांव में हुई थी, लेकिन स्थानीय सरकार को इसका वीडियो सामने आने के ढाई महीने बाद पता चला. इसका मतलब यह है कि वहां कोई सुरक्षा नहीं है.
पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, कुछ संगठनों से जुड़े एक हजार की संख्या में हथियारबंद हमलावर गांव में घुस आए और कुकी लोगों के घरों में आग लगा दी. जिससे ग्रामीण डर गए और जंगल में भाग गए. लेकिन उनके कब्जे से तीन महिलाएं मिलीं. भीड़ ने उन महिलाओं को निर्वस्त्र कर दिया. जब एक 21 साल की लड़की के साथ सबके सामने गैंग रेप हुआ तो उसका भाई भागकर आया और भीड़ ने उसे मार डाला. भीड़ संतुष्ट नहीं हुई, उन्होंने पूरी घटना का वीडियो भी बनाया. इसके बाद दो महिलाएं एक ग्रामीण की मदद से भाग निकलीं. ये बेहद दर्दनाक घटना है. वह किस जाति समुदाय से थी, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि वह एक महिला थी. घटना के बाद मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेंद्रसिंह ने पुलिस को दोषियों का पता लगाने का आदेश दिया लेकिन आरोपी अभी भी पकड़ से बाहर है.
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इस घटना से न सिर्फ देश में गुस्से की लहर है. सरकार कुछ नहीं कर रही है इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को कड़े शब्दों में फटकार लगाई है. मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ ने सरकार से कहा है कि यदि आप कोई कार्रवाई नहीं करेंगे तो हम करेंगे. यह दोनों सरकारों के लिए बेहद शर्मनाक है. मणिपुर पिछले तीन महीनों से जल रहा है लेकिन सरकार की ओर से दोनों समूहों को एक साथ लाने और समाधान खोजने का कोई प्रयास नहीं किया गया है और प्रधानमंत्री चुप हैं जबकि मणिपुर जल रहा है. इस सबकी बहुत बड़ी कीमत पूरे देश को उठानी पड़ रही है. पत्रकार परिषद में पूर्व मंत्री वसंतराव पुरके, सुरेश चिंचोलकर, बालासाहेब मोघे, राजीव चांदेकर उपस्थित थे.
जीने के अधिकार से वंचित
जब किसानों की आत्महत्या, बेरोजगारी और महंगाई बेतहाशा बढ़ गई है तो देश के प्रधानमंत्री कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं. सरकारी संस्थान बेचे जा रहे हैं. अब आईडीबीआई बैंक को भी बिक्री के लिए रखा गया है. मणिपुर की घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है. फिर भी प्रधानमंत्री ने संसद के बाहर जाकर बयान दिया. इन सबको देखते हुए क्या आदिवासी, गरीब, पिछड़े वर्ग के नागरिकों को इस देश में रहने का अधिकार है? पूर्व मंत्री वसंतराव पुरके ने यह सवाल उठाया और अपना गुस्सा जाहिर किया.
