E-20 पेट्रोल नीति के विरोध पर भाजपा नेता महेश नाईक का पलटवार, बताया राष्ट्रहित का निर्णय

E20 Ethanol Blending: यवतमाल के महागांव में भाजपा जिला उपाध्यक्ष महेश नाईक ने E-20 पेट्रोल नीति का समर्थन करते हुए इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हित में बताया।
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E20 पेट्रोल नीति(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Yavatmal E20 Petrol: केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E-20) करने का लिया गया निर्णय देश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए दूरदर्शी और राष्ट्रहित का निर्णय है। इस निर्णय के विरोध में कुछ राजनीतिक दलों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन जनता को गुमराह करने वाला है और वास्तविक तथ्यों को छिपाने का प्रयास है, ऐसी आलोचना भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष महेश नाईक ने की है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, थाईलैंड जैसे ८ कई देशों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग पिछले कई वर्षों से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। विशेष रूप से ब्राजील में दशकों से उच्च स्तर के इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग हो रहा है, जबकि अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े इथेनॉल उत्पादक और उपयोगकर्ता देशों में से एक है। इसलिए इथेनॉल मिश्रण कोई नई या प्रयोगात्मक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में स्वीकार की गई और प्रमाणित नीति है।

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कच्चे तेल के आयात पर घटेगी निर्भरता: महेश नाईक

महेश नाईक ने कहा कि भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। इथेनॉल मिश्रण से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी, देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इथेनॉल उत्पादन से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों को स्थायी बाजार उपलब्ध हो रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है। केंद्र सरकार की यह नीति किसान हित, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रहित की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि E-20 ईंधन के कारण सभी वाहन खराब हो रहे हैं, ऐसा प्रचार किया जा रहा है, लेकिन यह दावा तकनीकी रूप से प्रमाणित नहीं है।

सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ के लिए की जा रही बदनामी

वाहन निर्माता कंपनियां चरणबद्ध तरीके से E-20 अनुकूल वाहनों को बाजार में ला रही हैं और आवश्यक तकनीकी सुधार लगातार किए जा रहे हैं। महेश नाईक ने कहा कि 'देशहित, किसानहित और पर्यावरण अनुकूल नीति को केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। रचनात्मक सुझाव देने के बजाय जनता में भ्रम पैदा करना उचित नहीं है। नागरिकों को अफवाहों और भ्रामक प्रचार से दूर रहकर अधिकृत जानकारी पर विश्वास करना चाहिए।

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