टोल नाके को लेकर MVA आक्रामक, जिलाधिकारी द्वारा बैठक के निर्णय लिखित में नहीं देने का आरोप

Toll Plaza Controversy: दारव्हा-कारंजा मार्ग के विवादित टोल नाके को लेकर MVA ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए, निर्णय लिखित में न देने और नियम उल्लंघन का मुद्दा उठाया।
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Toll Collection Issue (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Darwha Karanja Road: दारव्हा-कारंजा मार्ग पर स्थित विवादित टोल नाके के मुद्दे को लेकर महाविकास आघाड़ी (MVA) ने बुधवार को स्थानीय विश्रामगृह में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान टोल नाका बंद करने से संबंधित बैठक में लिए गए निर्णयों पर सवाल उठाते हुए प्रशासन की भूमिका पर कड़ी नाराजगी जताई गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाविकास आघाड़ी के पदाधिकारियों ने बताया कि जिलाधिकारी के साथ हुई बैठक में टोल नाका बंद करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उस समय जिलाधिकारी ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश भी दिए थे। हालांकि, आज तक इन निर्णयों को लिखित रूप में उपलब्ध नहीं कराया गया है।

बदला गया जिलाधिकारी का निर्णय

उन्होंने आगे कहा कि बैठक के बाद एक दिन के लिए टोल नाका बंद रखा गया, लेकिन इसके बाद फिर से टोल वसूली शुरू कर दी गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आघाड़ी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि संभवतः किसी अदृश्य दबाव के कारण जिलाधिकारी का निर्णय बदला गया है। महाविकास आघाड़ी के पदाधिकारियों ने दावा किया कि टोल नाका स्थापित करने के नियमों का उल्लंघन किया गया है। नियमानुसार टोल नाका नगर परिषद या शहर सीमा से कम से कम 10 किलोमीटर दूर होना चाहिए, जबकि संबंधित टोल नाका इस नियम का उल्लंघन करते हुए स्थापित किया गया है।

विवादित टोल नाका स्थायी रूप से बंद किया जाए

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता राहुल ठाकरे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के उपजिला प्रमुख अजय गाडगे ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नियमों के खिलाफ टोल नाका स्थापित किया गया है और जब तक इसे बंद नहीं किया जाता, तब तक जनता के हित में आंदोलन जारी रहेगा। महाविकास आघाड़ी ने मांग की है कि विवादित टोल नाका स्थायी रूप से बंद किया जाए। इन घटनाक्रमों के चलते दारव्हा-कारंजा मार्ग पर टोल नाके का विवाद और अधिक बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

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महाविकास आघाड़ी की चेतावनी

संवाददाता सम्मेलन में उपस्थित तालुका कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश नवरंगे और अतुल राऊत ने 23 तारीख को आयोजित मोर्चे में नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो इसके लिए शासन और प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होगा।

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