

Highlights:
अगस्त और सितंबर में बारिश का लंबा अंतराल रहने से वाशिम जिले के जलप्रकल्पों में अपेक्षित जलभंडार जमा नहीं हो सका।
वाशिम शहर की जलापूर्ति के प्रमुख स्रोत एकबुर्जी जलप्रकल्प में 11.97 दलघमी की कुल क्षमता के मुकाबले 4.77 दलघमी उपयोगी पानी शेष है।
12 अक्टूबर की सुबह 7 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, सोनल जलप्रकल्प में 16.92 दलघमी की क्षमता के मुकाबले 3.85 दलघमी उपयोगी पानी बचा था।
Washim Water Reservoir: इस वर्ष कम बारिश का असर जिले के जलप्रकल्पों पर अभी से दिखाई देने लगा है। अगस्त और सितंबर में बारिश का लंबा अंतराल रहने से खरीफ फसलों के साथ जलस्रोत भी प्रभावित हुए हैं। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण जिले के मध्यम जलप्रकल्पों में अपेक्षित पानी जमा नहीं हो सका। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति और तेज धूप के कारण होने वाले है। अक्टूबर महीने में ही जलप्रकल्पों की जलप्रकल्प में कुल क्षमता का केवल 39.85 प्रतिशत उपयोगी जलभंडार शेष है।
बाष्पीकरण से जलभंडार लगातार घट रहा यह स्थिति होने से आगामी गर्मियों में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। वहीं, मालेगांव तहसील के कई गांवों को पानी उपलब्ध कराने वाले सोनल मध्यम जलप्रकल्प में जलभंडार घटकर 22.75 प्रश रह गया है। ऐसे में उपलब्ध पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग और आगामी महीनों के लिए जलापूर्ति का उचित नियोजन करना आवश्यक हो गया है।
वाशिम शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से एकबुर्जी मध्यम जलप्रकल्प पर निर्भर है। इस प्रकल्प की निर्धारित जलसंग्रहण क्षमता 11.97 दलघमी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 4.77 दलघमी उपयोगी जलभंडार शेष है, जो कुल क्षमता का 39.85 प्रश. है।
बारिश की कमी के कारण प्रकल्प में अपेक्षित पानी नहीं पहुंच पाया। शहर की बढ़ती आबादी, नियमित पेयजल की आवश्यकता और गर्मियों में बढ़ने वाले वाष्पीकरण को देखते हुए उपलब्ध पानी को आगामी मानसून तक पर्याप्त बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए पानी के उपयोग और शेष जलभंडार के बीच संतुलन बनाकर जलापूर्ति का नियोजन करना जरूरी है।
मालेगाव तहसील के सोनल मध्यम जलप्रकल्प की निर्धारित जलसंग्रहण क्षमता 16.92 दलघमी है। 12 अक्टूबर को सुबह 7 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें केवल 3.85 दलघमी उपयोगी जलभंडार शेष था।
यह कुल क्षमता का 22.75 प्रश. है। इस प्रकल्प से शेलू बाजार, वनोझा, दुबलवेल, किन्ही राजा, सोनाला, खेरडा, गोगरी, हिरंगी, लाठी, इचा और नागी सहित कई गांवों में जलापूर्ति की जाती है। जलभंडार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए गर्मियों में पानी की मांग बढ़ने पर इन गांवों में जलसंकट गंभीर होने की आशंका है।