वर्धा में पेयजल संकट गहराया, जलशुद्धीकरण केंद्र के बावजूद गंदा पानी; 3 गांवों की सप्लाई ठप

Wardha Water Crisis: वर्धा जिले के साहूर, सावंगा और धाडी गांवों में 10 दिनों से जलापूर्ति ठप है। दूषित पानी की सप्लाई से ग्रामीणों में रोष और बीमारी का खतरा बढ़ गया है।
Drinking Water Crisis Deepens in Wardha: Contaminated Water Despite Water Treatment Plant; Supply Halted in 3 Villages
दूषित पानी, वर्धा जल समस्या,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Wardha Contaminated Water Crisis: वर्धा जिले में आष्टी-शहीद तहसील के साहूर, सावंगा (पुनर्वसन) और धाडी गांवों में पिछले दस दिनों से पेयजल आपूर्ति ठप होने के कारण गंभीर जलसंकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जलशुद्धीकरण केंद्र होने के बावजूद दुर्गंधयुक्त, गंदा और दूषित पानी सप्लाई किए जाने से लोगों में रोष व्याप्त है। जानकारी के अनुसार लगभग 30 से 35 वर्ष पूर्व जीवन प्राधिकरण द्वारा वर्धा नदी से जलशुद्धीकरण योजना के माध्यम से इन गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी।

लेकिन समय-समय पर जलशुद्धीकरण केंद्र की देखभाल और मरम्मत नहीं होने के कारण स्थिति गंभीर होती चली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी गढ़वे तथा ठेकेदार राजीव देशमुख की लापरवाही के चलते फिल्टर प्लांट की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। बताया जा रहा है कि वर्धा नदी का जलस्तर कम होने से फिल्टर प्लांट की कुएंनुमा संरचना में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिसके कारण तीनों गांवों की जलापूर्ति बाधित हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि फिल्टर प्लांट होने के बावजूद दूषित और बदबूदार पानी की सप्लाई की जा रही है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है तथा संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है।

साहूर ग्राम पंचायत के सरपंच प्रकाश गायकवाड, सावंगा ग्राम पंचायत के सरपंच विनोद सोनोने, सामाजिक कार्यकर्ता गजानन भोरे तथा अन्य जनप्रतिनिधियों ने दूरभाष के माध्यम से जीवन प्राधिकरण के अधिकारी गहवे और ठेकेदार राजीव देशमुख से संपर्क कर समस्या से अवगत कराया।

मामले को अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया

आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने इस मामले की गंभीरता से नहीं लिया और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए टालमटोल जवाब दिए, ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा पिछले कई दिनों से जलापूर्ति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे है। जेसीबी और पोकलेन मशीनों की सहायता से खुदाई कर कुए में पानी लाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है।

ग्रापं प्रशासन चिंतित व हताश

लगातार बिगड़ती स्थिति से ग्राम पंचायत प्रशासन भी चिंतित और हताश नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को स्थिति से अवगत कराने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

इससे ग्राम पंचायत और नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने सांसद, विधायक तथा वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जीवन प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

यदि दूषित पानी या जलसंकट के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य अधवा जीवन को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी एवं ठेकेदार की होगी। ऐसा कहते हुए ग्रामीणों ने जल शुद्धीकरण केंद्र की तत्काल मरम्मत, लीकेज दुरुस्त करें व गांवों में स्वच्छ और नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

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