वर्धा के देवली में सोयाबीन व कपास की फसल जलकर राख! विधायक बकाने ने दिए ये निर्देश

Wardha News: वर्धा जिले के देवली तहसील में 150 एकड़ सोयाबीन और कपास की फसल कीटनाशक लुडो के छिड़काव से नष्ट हो गई। विधायक राजेश बकाने ने किसानों से मिलकर कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
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फसलों का जायजा लेते विधायक राजेश बकाने (फोटो नवभारत)
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Wardha Crop Damage News: वर्धा जिले के देवली तहसील के आंजी बर्हाणपुर क्षेत्र में करिब 150 एकड़ में खड़ी सोयाबीन और कपास की फसल लुडो नामक कीटनाशक के छिड़काव के कारण जलकर राख हो गई। यह कीटनाशक क्रॉप केमिकल्स इंडिया लिमिटेड कंपनी का बताया जा रहा है। इस घटना से लाखों रुपयों का नुकसान हुआ है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

घटना की जानकारी मिलते ही विधायक राजेश बकाने ने सोमवार को नुकसानग्रस्त किसानों से मिलने पहुंचे। खेतों का दौरा कर निरिक्षण किया। इस दौरान देवली तहसीलदार समर्थ क्षीरसागर, उपविभागीय कृषि अधिकारी वैष्णवी शिंदे, कृषि विज्ञान केंद्र सेलसुरा के वैज्ञानिक डॉ. जीवन कतोरे, तहसील कृषि अधिकारी प्रतीक्षा मेंढे, कृषि तकनीकी अधिकारी महेश खर्डे, देवली के थानेदार अमोल मंडलकर उपस्थित थे।

क्या बोले विधायक बकाने

अधिकारियों की उपस्थिति में पंचनामा किया गया। स्थिति की वस्तुनिष्ठ समीक्षा की गई। विधायक बकाने ने किसानों की पीड़ा सुनते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, किसानों की मेहनत की फसल एक रात में जलकर राख हो गई है।

कंपनी ने किसानों के साथ धोखा किया है। सिर्फ जुर्माना लगाना काफी नहीं, बल्कि कंपनी का लाइसेंस रद्द कर जिम्मेदारों पर कानूनी कार्रवाई करें। यह मुद्दा विधानमंडल में उठाएंगे और जब तक किसानों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक शांत नहीं बैठेंगे।

कीटनाशक के उपयोग के बाद गंभीर प्रभाव

कंपनी के पैकिंग पर इसे सिस्टमेटिक और कॉन्टैक्ट इनसेक्टिसाइड बताया गया था, लेकिन छिड़कांव के कुछ घंटों बाद ही फसलों में पत्तियां सूखना, तने मुरझाना और फलियों का न भरना जैसे गंभीर प्रभाव देखने को मिले। बेहतर क्वालिटी, बेहतर क्रॉप्स के नारे के साथ बेचे गए इस कीटनाशक ने किसानों की मेहनत को बर्बाद कर दिया, ऐसा आरोप है।

दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग

विधायक बकाने ने कहा कि, कृषि विभाग को इस मामले की तुरंत जांच कर, कंपनी से नुकसान भरपाई और जुर्माना वसूलना चाहिए। साथ ही यह निम्न गुणवत्ता की दवा बाजार में कैसे पहुंची, इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए और यदि इसमें विभागीय लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराना चाहिए। उनपर कानूनी कार्रवाई करे। इस घटना से तहसील में भारी असंतोष का माहौल है और जब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

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