वर्धा प्रशासन का सख्त फैसला, बिना लाइसेंस आम बेचा तो जेल! कार्बाइड से पकाए फल बेचने वालों पर होगी कार्रवाई
Wardha News: वर्धा में बिना लाइसेंस आम बेचने पर होगी फौजदारी कार्रवाई! प्रशासन ने कैल्शियम कार्बाइड पर लगाया बैन। जानें इथिलीन गैस और घरेलू तरीकों से आम पकाने की सुरक्षित विधि।
- Written By: गोरक्ष पोफली
फलविक्रेता (सोर्स: सोशल मीडिया)
Wardha Mango License Mandatory: वर्धा प्रशासन ने बाजार में बिकने वाले आमों की गुणवत्ता और ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक सख्त निर्णय लिया है। अब रेहड़ी या बंडी पर आम बेचने वाले हर छोटे-बड़े विक्रेता को प्रशासन से आधिकारिक लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई विक्रेता बिना परमिट के आम बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ न केवल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, बल्कि फौजदारी मामला (FIR) भी दर्ज किया जा सकता है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बाजार में अवैध रूप से आने वाले हानिकारक रसायनों से पके आमों पर रोक लगाना है।
कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध
प्रशासन ने आमों को पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘कैल्शियम कार्बाइड‘ (जिसे स्थानीय भाषा में ‘मसाला’ कहा जाता है) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। FSSAI के अनुसार, कार्बाइड में आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे जहरीले तत्व होते हैं। इसके सेवन से चक्कर आना, प्यास लगना, पेट में जलन और उल्टी जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे आम न खरीदें जिनके छिलके पर काले धब्बे (Black blotches) हों, क्योंकि ये कार्बाइड से पकाए गए हो सकते हैं। आम को हमेशा साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
आम पकाने का वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीका
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आम पकाने के लिए इथिलीन गैस के उपयोग को सुरक्षित माना है। इथिलीन एक प्राकृतिक हार्मोन है जो फलों को पकने के लिए प्रेरित करता है। नियमानुसार, 100 ppm तक इथिलीन गैस का उपयोग करना मान्य है। इसके लिए 20°C से 25°C का तापमान और 90-95% की आर्द्रता सबसे उपयुक्त होती है। विक्रेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे इथिलीन पाउच का उपयोग करते समय उसे सीधे फलों के संपर्क में न आने दें, बल्कि एक छेद वाले प्लास्टिक डिब्बे में रखकर पेटी के बीच में रखें।
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पारंपरिक और घरेलू पद्धतियों से पकाएं आम
यदि आप घर पर या बिना किसी मशीन के आम पकाना चाहते हैं, तो सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके सबसे अच्छे हैं। कच्चे आमों को कागज में अलग-अलग लपेटकर या पेपर बैग में रखने से वे 4-6 दिनों में पक जाते हैं। इसके अलावा, प्राचीन पद्धति के अनुसार आमों को चावल के भूसे या गेहूं की भूसी की परतों के बीच दबाकर भी पकाया जा सकता है। हवाबंद चावल के डिब्बे या कोठी में कच्चे आम रखना भी एक प्रभावी घरेलू उपाय है। ये तरीके न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि इससे आम का प्राकृतिक स्वाद और सुगंध भी बरकरार रहती है।
