बिजली गिरने से 49 लोगो की मौत, यवतमाल के लोगो में डर का माहोल, प्रशन ने जारी किया अलर्ट
Wardha Monsoon: वर्धा जिले में साढ़े छह साल में आसमानी बिजली से 49 मौतें, 57 घायल। प्राकृतिक आपदाओं में कुल 75 लोगों की जान गई। प्रशासन ने 10 स्थानों पर लाइटनिंग अरेस्टर लगाए।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Wardha Lightning Strike 49 Deaths: वर्धा जिले में पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। मानसून सक्रिय होने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में मेघगर्जना के साथ तेज बारिश हो रही है। मौसम की इस स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है। हाल ही में हिंगणघाट तहसील के एक गांव में आकाशीय बिजली गिरने से एक बैल जोड़ी की मौत हो गई।
हर वर्ष बारिश के मौसम में आकाशीय बिजली गिरने के कारण जिले में जान-माल का भारी नुकसान होता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े छह वर्षों में बिजली गिरने की विभिन्न घटनाओं में 49 लोगों की असामयिक मौत हुई है, जबकि 57 लोग गंभीर रूप से झुलसकर घायल हुए हैं।
विभिन्न आपदाओं में 75 लोगों ने गंवाई जान
प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े छह वर्षों में आकाशीय बिजली गिरने, बाढ़ में बहने, मलबे के नीचे दबने तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण कुल 75 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि 74 लोग घायल हुए हैं। इस अवधि के दौरान 135 छोटे और 231 बड़े, यानी कुल 366 मवेशी भी प्राकृतिक आपदाओं का शिकार बने हैं।
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इसके अलावा, वर्धा जिले से होकर 12 प्रमुख नदियां बहती हैं। नदी के तट पर बसे गांवों में हर वर्ष बाढ़ का खतरा बना रहता है। जिले में कई छोटे-बड़े तालाब और सिंचाई परियोजनाएं भी हैं। अत्यधिक वर्षा होने पर इन परियोजनाओं का बैकवॉटर (भराव का पानी) गांवों और खेतों तक पहुंच जाता है, जिससे फसलों को भारी नुकसान होता है। हालांकि सरकार प्रभावितों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि यह सहायता राशि न तो पर्याप्त होती है और न ही समय पर मिल पाती है।
10 संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए ‘लाइटनिंग अरेस्टर सिस्टम’
आकाशीय बिजली से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिले के 10 प्रमुख और संवेदनशील स्थानों पर ‘लाइटनिंग अरेस्टर सिस्टम’ (तड़ित चालक प्रणाली) स्थापित किए गए हैं। यह आधुनिक प्रणाली बिजली गिरने की स्थिति में उसके उच्च विद्युत प्रवाह को अवशोषित कर सुरक्षित रूप से जमीन के भीतर (अर्थिंग) पहुँचा देती है। इससे मानव जीवन, भवनों तथा विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, जिले में यह प्रणाली मुख्य रूप से निम्नलिखित स्थानों पर कार्यरत है:
- सेलू तहसील: येलाकेली
- समुद्रपुर तहसील: लोखंडी एवं गिरड़
- हिंगणघाट तहसील: लाडकी एवं अल्लीपुर
- आर्वी तहसील: निंबोली एवं वाढोणा
- आष्टी तहसील: साहुर
- कारंजा तहसील: रहाटी
- वर्धा तहसील: मुख्यालय क्षेत्र
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और कड़कड़ाती बिजली के समय पेड़ों या खुले मैदानों में जाने से बचें।
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गाज गिरने से मृतकों की संख्या
| वर्ष | मृत्यु | घायल |
| 2020 | 10 | 13 |
| 2021 | 05 | 16 |
| 2022 | 12 | 09 |
| 2023 | 07 | 09 |
| 2024 | 07 | 05 |
| 2025 | 07 | 14 |
| 2026 (अब तक) | 01 | 00 |
| कुल | 49 | 57 |
