वर्धा से राजनीतिक हमला: भाजपा पर सपकाल का बड़ा आरोप: 21 जगहों पर AIMIM से 'अप्रत्यक्ष समझौता'

Wardha Harshvardhan Sapkal: वर्धा में हर्षवर्धन सपकाल ने दावा किया कि भाजपा ने 21 जगहों पर AIMIM से अप्रत्यक्ष समझौते किए। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का पराक्रम अद्वितीय है।
Political attack from Wardha: Sapkal's big allegation against BJP: 'Indirect agreement' with AIMIM at 21 places
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Wardha Political Controversy: वर्धा महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने रविवार को वर्धा स्थित गांधी आश्रम के दौरे के बाद पत्रकारों से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी पर कई राजनीतिक आरोप लगाए।

सपकाल ने दावा किया कि राज्य के 21 स्थानों पर भाजपा ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के साथ अप्रत्यक्ष समझौते किए, जिसके बाद स्थानीय निकायों में समर्थन लेकर सत्ता हासिल की।

उन्होंने कहा कि भाजपा को उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरव के बारे में सिखाने की आवश्यकता नहीं है। एक पूर्व बयान के संदर्भमें उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कहा था कि जिस प्रकार छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज का आदर्श स्थापित किया, उसी प्रकार टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।

उन्होंने दोहराया कि शिवाजी महाराज का पराक्रम अद्वितीय है। हर्षवर्धन सपकाल का आरोप है कि उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से अलग अर्थ देकर प्रस्तुत किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के मूलभूत मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए उनके बयान को हिंदू मुस्लिम संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है, सपकाल के अनुसार, नगर पालिका और महानगरपालिका चुनावों के दौरान भाजपा के घोषणापत्र में टीपू सुल्तान का चित्र प्रकाशित किया गया था। उन्होंने संविधान में विभिन्न ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के चित्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन पर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री पर उठाए सवाल

सपकाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं, उन्होंने हाल के एक दुर्घटना मामले, अतिवृष्टि से संबंधित केंद्रीय सहायता, कर्जमाफी तथा अमेरिका के साथ हुए कृषि समझौते जैसे विषयों का उल्लेख किया।

सपकाल ने कहा कि राज्य के विकास और जनहित के मुद्दों पर चर्चा होना अधिक आवश्यक है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और वैचारिक मुद्दों को लेकर बहस तेज है।

Navbharat Live
navbharatlive.com