शांतिदेवी जाजू की अंतिम यात्रा को महिलाओं ने दिया कंधा, 17 साल की उम्र में भारत छोड़ो आंदोलन में लिया हिस्सा

Wardha Freedom Fighter: स्वतंत्रता सेनानी शांतिदेवी दामोदर जाजू का 102 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अंतिम यात्रा में परिवार की महिलाओं ने पार्थिव देह को कंधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
wardha freedom fighter shantidevi jaju death last rites
शांतिदेवी जाजू निधन(सोर्सः सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Wardha Freedom Fighter Shantidevi Jaju Death: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शांतिदेवी दामोदर जाजू का 102 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शांतिदेवी जाजू की अंतिम यात्रा में एक उल्लेखनीय दृश्य देखने को मिला। अंत्येष्टि में परिवार की महिलाओं ने भी पार्थिव देह को कंधा दिया। बेटों सुनील एवं राहुल जाजू ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान समाजबंधुओं, गांधीवादी कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। तहसीलदार फुंडकर ने उपस्थित होकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया।

वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान शांतिदेवी ने देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय सहभागिता की। उस समय उनकी आयु महज 17 वर्ष थी। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण अंग्रेजी शासन ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उस दौरान वे गर्भवती थीं और करीब पांच माह तक गर्भावस्था की पीड़ा के साथ कारावास की यातनाएं भी सहनी पड़ीं।

wardha freedom fighter shantidevi jaju death last rites
मंत्री उदय सामंत का हेलीकॉप्टर मुंबई-नागपुर-नासिक के बीच घूमता रहा, नहीं मिली लैडिंग की जगह, फिर जो हुआ...

साहस और राष्ट्रभक्ति से समझौता नहीं

कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने साहस और राष्ट्रभक्ति से समझौता नहीं किया। शांतिदेवी महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित आदर्श गृहिणी थीं। सादगी, सेवा, त्याग और संस्कार उनके जीवन की पहचान रहे। उन्होंने अपने परिवार में देशभक्ति और सामाजिक मूल्यों की भावना को मजबूत किया।

‘देश पहले’ का विचार

उनकी अंतिम यात्रा में विदर्भ प्रादेशिक माहेश्वरी संगठन के पूर्व अध्यक्ष एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट दामोदरजी सारडा (चंद्रपुर), वर्तमान अध्यक्ष प्रा. रमन हेडा (अकोला) सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु, गांधीवादी कार्यकर्ता एवं नागरिक शामिल हुए। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपस्थित लोगों ने कहा कि शांतिदेवी जाजू का शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उनका ‘देश पहले’ का विचार और त्याग की प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बनी रहेगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com