वर्धा: भीषण गर्मी में वन्यजीवों का सहारा बने 173 वॉटर होल, बोर व्याघ्र प्रकल्प व वन क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा
Wildlife Drinking Water Supply: वर्धा के जंगलों और बोर व्याघ्र प्रकल्प में सूखते जलस्रोतों के बीच 173 कृत्रिम वॉटर होल से वन्यजीवों को राहत शिकार रोकने और निगरानी के लिए ट्रैप कैमरे और गश्त बढ़ाई गई।
- Written By: रूपम सिंह
Wildlife Drinking Water (सोर्सः सोशल मीडिया)
वर्धा में गर्मी के दिनों में जंगलों के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगते हैं। इसके चलते वन्यजीव पानी की तलाश में गांव और खेतों की ओर रुख करते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने जिले के प्रादेशिक वन क्षेत्र और बोर व्याघ्र प्रकल्प में जलकुंडों में नियमित जलापूर्ति की विशेष व्यवस्था की है। प्रादेशिक वन क्षेत्र के आठ ठिकानों पर कृत्रिम, प्राकृतिक तथा सोलर पंप आधारित कुल 173 वॉटर होल बनाए गए हैं। इन जलस्रोतों के माध्यम से वन्यजीवों को राहत मिल रही है।
वाटरहोल से मिल रही राहत
बोर व्याघ्र प्रकल्प क्षेत्र में भी आवश्यक उपाययोजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिले के घने वन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, नीलगाय, बंदर, मोर, जंगली सूअर सहित कई दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं। गर्मी में जलस्रोत सूखने पर ये वन्यजीव पानी की तलाश में गांवों की ओर पहुंच जाते हैं।
इससे खेती को नुकसान, पालतू पशुओं पर हमले, खुले कुओं में गिरने की घटनाएं तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका रहती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए वन विभाग ने समय रहते जलस्रोतों की व्यवस्था शुरू कर दी है। कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक जलस्रोत अभी से सूख गए हैं, ऐसे में वॉटर होल ही वन्यजीवों के लिए सहारा बने हुए हैं।
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ट्रैप कैमरों से निगरानी
वन विभाग द्वारा जंगल स्थित जलकुंडों की सफाई कर उनमें पानी भरा जा रहा है। कुछ स्थानों पर श्रमदान से नए वॉटर होल भी बनाए गए हैं। जलकुंडों के आसपास ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से वन्यजीवों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। हाल के दिनों में बड़ी संख्या में वन्यजीवों को इन जलकुंडों पर पानी पीते हुए देखा गया है। वन्यजीवों के शिकार को रोकने के लिए पेट्रोलिंग भी बढ़ा दी गई है।
जलस्रोतों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
- बोर व्याघ्र प्रकल्प में तालाबों के अलावा प्राकृतिक और कृत्रिम जलस्रोत बनाए गए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर नए जलस्रोत प्रस्तावित हैं।
- विभिन्न स्थानों पर बने वॉटर होल में टैंकर से नियमित जलापूर्ति की जाती है।
- पेट्रोलिंग दल इन जलस्रोतों की लगातार निगरानी करते हैं, ताकि कोई शिकारी पानी में विष मिलाने जैसी घटना को अंजाम न दे सके,
- सुरक्षा की दृष्टि से विशेष सतर्कता बरती जा रही है, ऐसी जानकारी वन अधिकारियों ने दी।
