Wildlife Drinking Water (सोर्सः सोशल मीडिया)
वर्धा में गर्मी के दिनों में जंगलों के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगते हैं। इसके चलते वन्यजीव पानी की तलाश में गांव और खेतों की ओर रुख करते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने जिले के प्रादेशिक वन क्षेत्र और बोर व्याघ्र प्रकल्प में जलकुंडों में नियमित जलापूर्ति की विशेष व्यवस्था की है। प्रादेशिक वन क्षेत्र के आठ ठिकानों पर कृत्रिम, प्राकृतिक तथा सोलर पंप आधारित कुल 173 वॉटर होल बनाए गए हैं। इन जलस्रोतों के माध्यम से वन्यजीवों को राहत मिल रही है।
बोर व्याघ्र प्रकल्प क्षेत्र में भी आवश्यक उपाययोजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिले के घने वन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, नीलगाय, बंदर, मोर, जंगली सूअर सहित कई दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं। गर्मी में जलस्रोत सूखने पर ये वन्यजीव पानी की तलाश में गांवों की ओर पहुंच जाते हैं।
इससे खेती को नुकसान, पालतू पशुओं पर हमले, खुले कुओं में गिरने की घटनाएं तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका रहती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए वन विभाग ने समय रहते जलस्रोतों की व्यवस्था शुरू कर दी है। कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक जलस्रोत अभी से सूख गए हैं, ऐसे में वॉटर होल ही वन्यजीवों के लिए सहारा बने हुए हैं।
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वन विभाग द्वारा जंगल स्थित जलकुंडों की सफाई कर उनमें पानी भरा जा रहा है। कुछ स्थानों पर श्रमदान से नए वॉटर होल भी बनाए गए हैं। जलकुंडों के आसपास ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से वन्यजीवों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। हाल के दिनों में बड़ी संख्या में वन्यजीवों को इन जलकुंडों पर पानी पीते हुए देखा गया है। वन्यजीवों के शिकार को रोकने के लिए पेट्रोलिंग भी बढ़ा दी गई है।