

Wardha Drought Trigger-1: वर्धा जिले में कम बारिश और बारिश के लंबे अंतराल के कारण खरीफ फसलों को हुए नुकसान का सर्वेक्षण एवं संयुक्त पंचनामा तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। वर्धा जिले की 7 तहसीलों को सूखे के ट्रिगर-1 में शामिल किए जाने के बाद प्रशासन ने फसल नुकसान का वस्तुनिष्ठ आकलन शुरू किया है।
अब तक इन तहसीलों में 19061 किसानों के 38,824.75 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल नुकसान के पंचनामे पूरे किए जा चुके हैं। हालांकि कारंजा तहसील में अभी तक नुकसान के सर्वेक्षण का काम शुरू नहीं हुआ है। प्रशासन ने शेष सर्वेक्षण अगले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस वर्ष खरीफ सीजन में अपेक्षा से कम बारिश होने के साथ ही बारिश में लंबे अंतराल का फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कई क्षेत्रों में फसलों की वृद्धि प्रभावित हुई है। बारिश की अनियमितता के कारण उत्पादन में कमी आने की आशंका कृषि विभाग ने भी व्यक्त की है। किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए अधिकारियों द्वारा पंचनामा तैयार किया जा रहा है।
उक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि समुद्रपुर में किसानों की संख्या के लिहाज से सबसे अधिक पंचनामे पूरे हुए है, जबकि क्षेत्रफल के लिहाज से आर्वी सबसे आगे है। जिले की सात तहसीलों में पंचनामे का काम शुरू होने के बावजूद कारंजा तहसील में अभी तक फसल नुकसान के सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में कारंजा के प्रभावित किसानों में नुकसान के पंचनामे और आगे मिलने वाली सहायता को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रशासन की ओर से शेष क्षेत्र का सर्वेक्षण जल्द पूरा करने की बात कही गई है।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी अरविंद उपरिकर ने कहा कि फसल नुकसान की वस्तुनिष्ठ जानकारी दर्ज करने तथा पात्र किसानों को सरकार के मानदंडों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए पंचनामे महत्वपूर्ण है। सात तहसीलों में 19 हजार 61 किसानों के पंचनामे पूरे हो चुके हैं। शेष सर्वेक्षण का काम अगले सप्ताह युद्धस्तर पर पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।