

Highlights:
वर्धा जिले के 11 बड़े और मध्यम जलाशयों में फिलहाल केवल 67 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह शेष है।
मदन परियोजना में केवल 20.70 प्रतिशत और मदन उन्नई बांध में 17.93 प्रतिशत जलसंग्रह बचा है, जो सबसे अधिक चिंता का विषय है।
पंचधारा परियोजना में 36.80 प्रतिशत, डोंगरगांव में 57.55 प्रतिशत और सुकली लघु परियोजना में 54.92 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
Wardha Dam Water Storage: इस वर्ष मानसून के दौरान जिले में अपेक्षा से कम बारिश होने का सीधा असर जलाशयों के जलस्तर पर पड़ा है। जिले के 11 बड़े और मध्यम जलाशयों में फिलहाल केवल 67 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह उपलब्ध है। पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत तक सभी जलाशय शत-प्रतिशत भरे हुए थे, लेकिन इस बार स्थिति इसके बिल्कुल विपरित है। जलसंग्रह में आई भारी कमी को देखते हुए इस वर्ष गर्मी शुरू होने से पहले ही जिले में जलसंकट गहराने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
वर्धा जिले में बोर, निम्न वर्धा, धाम, पोथरा, पंचधारा, डोंगरगांव, मदन, मदन उन्नई, लाल नाला, वर्धा कार नदी और सुकली लघु सहित कुल 11 जल प्रकल्प हैं। इन जलाशयों का पानी खेती, नागरिकों की पेयजल जरूरतों के साथ ही वन्यजीवों के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस वर्ष पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई जल प्रकल्पों में अपेक्षित जलसंग्रह नहीं हो पाया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बोर परियोजना में 64.44 प्रतिशत, निम्न वर्धा में 70.21 प्रतिशत, धाम में 68.07 प्रतिशत, पोथरा में 80.31 प्रतिशत, पंचधारा में 36.80 प्रतिशत, डोंगरगांव में 57.55 प्रतिशत, मदन में 20.70 प्रतिशत, मदन उन्नई बांध में 17.93 प्रतिशत, लाल नाला में 78.54 प्रतिशत, वर्धा कार नदी में 60.58 प्रतिशत तथा सुकली लघु परियोजना में 54.92 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह शेष है। विशेष रूप से मदन और मदन उन्नई परियोजनाओं में जलसंग्रह की बेहद कम स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
महाकाली स्थित धाम जलप्रकल्प जिले के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस परियोजना से वर्धा शहर के साथ ही पिपरी मेघे और आसपास के 14 गांवों को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। हालांकि, इस परियोजना में भी अपेक्षा के अनुरूप जलसंग्रह नहीं होने से आगामी दिनों में जलापूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत तक जिले के सभी 11 जलाशय 100 प्रतिशत भरे हुए थे। इस वर्ष की स्थिति से बारिश की कमी का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
जलाशयों में उपलब्ध जलसंग्रह को देखते हुए प्रशासन के साथ ही नागरिकों को भी अभी से पानी के उपयोग का नियोजन करना जरूरी है। पानी की बर्बादी रोकने, उपलब्ध जल का किफायत से उपयोग करने और जलसंवर्धन के उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। यदि समय रहते पानी की बचत और नियोजन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगामी गर्मी में गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।