वर्धा के बोर टाइगर रिजर्व में नवंबर से जलसंकट की आशंका,वन्यजीवों के लिए बढ़ी चिंता, वन विभाग ने शुरू की तैयारी

Bor Tiger Reserve water crisis:कम बारिश के कारण वर्धा के बोर टाइगर रिजर्व में प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं। वन विभाग को नवंबर से कृत्रिम जलस्रोतों में पानी भरने की जरूरत पड़ने की आशंका है।
wardha bor tiger reserve water crisis november
बोर टाइगर रिजर्व जलसंकट(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Wardha Bor Tiger Reserve: बोर टाइगर रिजर्व में वैसे तो वन्यजीवों के लिए पानी और चारे की पर्याप्त उपलब्धता रहती है। किंतु इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण बारिश कम होने से जंगल के प्राकृतिक जलस्त्रोत अभी से सूखने लगे हैं। ऐसे में आगामी नवंबर माह से ही कृत्रिम जलस्रोतों में पानी भरने की आवश्यकता पड़ सकती है। संभावित जलसंकट को देखते हुए वन प्रशासन ने अभी से नियोजन शुरू कर दिया है।

बोर टाइगर रिजर्व का कोअर क्षेत्र करीब 138 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें बोर और न्यू बोर क्षेत्र का समावेश है। जैव विविधता से समृद्ध इस क्षेत्र में पानी और चारे की सामान्यतः पर्याप्त उपलब्धता रहती है। प्राकृतिक जलस्रोतों में छोटे नाले और झरने शामिल हैं। हालांकि गर्मी के मौसम में इनमें से कुछ जलस्त्रोत सूख जाते हैं।

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जलसंकट से निपटने प्रशासन तैयार

बोर टाइगर रिजर्व के वनपरिक्षेत्र अधिकारी नितीन बोरकर ने कहा कि कोअर क्षेत्र के कुछ प्राकृतिक जलस्रोतों में अभी से पानी का स्तर कम हो गया है। कुछ नाले और झरने सामान्यतः वर्षभर जलयुक्त रहते हैं, लेकिन इस वर्ष कम बारिश के कारण वे भी सूखने की कगार पर है। स्थिति को देखते हुए वन प्रशासन ने जलसंकट से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। आवश्यकता पड़ने पर नवंबर माह से ही कुछ प्राकृतिक एवं कृत्रिम जलस्रोतों में नियमित रूप से पानी भरने की व्यवस्था की जाएगी।

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बोर टाइगर रिजर्व(सोर्सः सोशल मीडिया)

68 वर्ग किमी क्षेत्र रहता प्रभावित

बोर के करीब 68 वर्ग किमी क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगभग 35 कृत्रिम जलस्रोत तैयार किए जाते हैं। सामान्यतः फरवरी और मार्च माह में सोलर मोटर पंप तथा टैंकरों के माध्यम से इनमें पानी भरना शुरू किया जाता है। लेकिन इस वर्ष कम बारिश के कारण प्राकृतिक जलस्रोतों में अभी से पानी कम होने लगा है। ऐसे में जंगली जानवरों का रूख गावों की ओर बढ़ सकता है। प्रतिवर्ष ग्रीष्मकाल में जंगली जानवर व मानव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती है। जिसे रोकने वनविभाग द्वारा अभी से नियोजन किया जा रहा है।

नवंबर से ही होगी जल किल्लत

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष बोर के कोअर क्षेत्र में नवंबर माह से ही कृत्रिम जलस्रोतों में नियमित रूप से पानी भरने की आवश्यकता पड़ सकती है। कुछ ऐसे प्राकृतिक जलस्रोत भी हैं, जो सामान्य परिस्थितियों में वर्षभर नहीं सूखते। इस बार कम बारिश के कारण उनके भी सूखने की आशंका है। इसे देखते हुए वन विभाग ने कृत्रिम जलस्रोतों की संख्या बढ़ाने का नियोजन किया है। इसी तरह की स्थिति बोर और न्यू बोर के कोअर तथा बफर क्षेत्रों में भी उत्पन्न होने की संभावना जताई जा रही है।

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