मनरेगा घोटाला: वेंडर के बहाने अपनी जेब भर रहे थे आरोपी, बैंक ट्रांजेक्शन की जांच में खुलेंगे कई और बड़े नाम!

Wardha MGNREGA Scam: वर्धा में मनरेगा निधि घोटाले में बड़ा खुलासा। वेंडर 'अंबिका' के खाते से जुड़ा था आरोपी प्रणाली कसर का पैन कार्ड। आर्थिक अपराध शाखा जल्द दाखिल करेगी चार्जशीट।
Major breakthrough in Wardha MGNREGA scam.
वर्धा न्यूज
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Wardha News: वर्धा जिले के आर्वी पंचायत समिति में हुए मनरेगा योजना के निधि में भ्रष्टाचार मामले में जांच कर रहे अधिकारियों को मुख्य आरोपी और बर्खास्त सहायक कार्यक्रम अधिकारी प्रणाली कसर के खिलाफ ठोस सबूत मिले हैं। इस मामले में जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि 'अंबिका टीबीएम सप्लायर' को वेंडर के रूप में पंजीकृत किया गया था और 9 जनवरी 2012 को आर्वी के भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में बैंक खाता खोला गया था।

चौंकाने वाली बात यह है कि इस बैंक खाते से जुड़ा पैन कार्ड प्रणाली का था। अब तक इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें से एक, समूह विकास अधिकारी सुनीता मरसकोल्हे, जमानत पर बाहर हैं, जबकि मुख्य आरोपी प्रणाली कसर अभी न्यायिक हिरासत में है। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की जा रही है।

'वेट एंड वॉच' नीति

चूंकि प्रणाली कसर न्यायिक हिरासत में है, इसलिए जांच अधिकारी ने इस मामले में शीघ्र आरोपपत्र दाखिल करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों द्वारा इस मामले में 'वेट एंड वॉच' नीति अपनाते हुए आर्वी में स्थानीय अधिकारियों, जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, बैंक से भी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अंबिका नामक वेंडर के पैन कार्ड प्रणाली कसर से जुड़ा हुआ था।

व्हाउचर्स व सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी प्राप्त

आर्थिक अपराध शाखा के सहायक पुलिस निरीक्षक मामले की जांच में जुटे है। अंबिका नामक वेंडर के बैंक खाते में आए सभी फंड के व्हाउचर और नरेगा सॉफ्टवेयर से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्रित की है। सूत्रों के अनुसार, इन दस्तावेजों में यह सामने आया कि आरोपियों ने सरकारी निधि की कितनी चालाकी से हेराफेरी की है, जिससे पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए।

इसके बाद यह जानकारी भी मिली कि अंबिका नामक वेंडर के खाते में आया। सरकारी फंड आगे किस अन्य बैंक खाते में स्थानांतरित किया गया, इसकी जानकारी भी जल्द ही बैंकों से जांच अधिकारियों को प्राप्त होने वाली है। इस जानकारी के बाद जांच अधिकारी मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।

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