

Wardha News: राज्य की तिजोरी खाली है, ठेकेदारों के पैसे बकाया हैं और आम किसान कर्ज के बोझ तले आत्महत्या कर रहा है, ऐसे में यह सरकार नासिक में होने वाले आगामी कुंभमेले के लिए 35 हजार करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि उड़ाने जा रही है। पहले दुनिया भर के पाप करो और फिर 35 हजार करोड़ खर्च करके कुंभ मेले में डुबकी लगाओ-इससे कौन सा पुण्य मिलेगा ? अगर सरकार सचमुच पुण्य कमाना चाहती है, तो संकट में फंसे किसानों के साथ खड़ी हो और उनके प्राण बचाए।
उस एक डुबकी की तुलना में आत्महत्या के कगार पर पहुंचे किसान को बचाना लाखों गुना अधिक पुण्य का काम होगा," यह तीखा प्रहार कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने किया है। वर्धा में मीडिया से बात करते हुए वडेट्टीवार ने राज्य की सूखाग्रस्त स्थिति, किसानों की कर्जमाफी, पुणे के एमपीएससी (MPSC) आंदोलन, तिजोरी पर 10 लाख करोड़ रुपए के कर्ज, ओबीसी समाज के मुद्दों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के कार्यकाल पर बेहद आक्रामक तेवर में बयान दिए।
धर्म के नाम पर भावनात्मक धंधे बंद करें शक्तिपीठ महामार्ग, समृद्धि परियोजना और अब कुंभ मेले के लिए 35 हजार करोड़ रुपए की फिजूलखर्ची शुरू है। दूसरी ओर, दूसरा आर 2018 के सुखा पैकेज का आधा पैसा भी अभी तक किसानों को नहीं मिला है। हमारी स्पष्ट मांग है कि ये भावनात्मक उद्योग बंद किए जाएं। चाहें तो और 2 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लें, लेकिन राज्य के किसानों का सातबारा (भूमि रिकॉर्ड) पूरी तरह कोरा करें और प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपए की तत्काल सूखा राहत राशि दें।
पुणे में चल रहे एमपीएससी छात्रों के आंदोलन को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर सीधा निशाना साधा। एमपीएससी की धांधली सामने आने के बाद सरकार ने सचिव का ट्रांसफर कर दिया, तो फिर विवादित अध्यक्ष का इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा है? मुख्यमंत्री फडणवीस और अध्यक्ष के बीच आखिर ऐसी कौन सी घनिष्ठ दोस्ती है कि लाखों छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाकर भी उन्हें बचाया जा रहा है? मुख्यमंत्री को तुरंत इस पर पुनर्विचार कर अध्यक्ष को बर्खास्त करना चाहिए।