Sanjay Shirsat Hinganghat News: हिंगनघाट सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार समाज के प्रत्येक व्यक्ति को विकास की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों को गति दी जा रही है।
वे हिंगनघाट नगर परिषद द्वारा जिला वार्षिक योजना के अंतर्गत 1 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित भारतरत्न डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की प्रतिमा के अनावरण एवं परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने की, जबकि सांसद अमर काले, विधायक समीर कुणावार, नगराध्यक्ष डॉ. नयना तुलसकर, उपाध्यक्ष निलेश ठोंबरे सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री शिरसाट ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। महाड स्थित चवदार तालाब के विकास के लिए 56 करोड़ रुपये तथा दादर स्थित चैत्यभूमि के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। साथ ही, बौद्धगया में महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं के लिए आवास सुविधा विकसित करने हेतु 10 एकड़ जमीन खरीदने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के अंतर्गत अगले महीने बौद्धगया के लिए विशेष ट्रेन चलाई जाएगी, जिसमें यात्रियों को मुफ्त यात्रा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में विधायक समीर कुणावार ने नगर परिषद द्वारा कम समय में कार्य पूर्न करने की सराहना की तथा आर्टीबार्टी प्रशिक्षन केंद्र, वातानुकूलित अध्ययन कक्ष और अण्णाभाऊ साठे वस्ती सुधार निधि बढ़ाने की मांग रखी।
समारोह के अंत में मान्यवरों के हाथों प्रतिमा का अनावरन और सौंदर्यीकरण कार्य का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
हिंगनघाट में 1 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण इस अवसर पर पालकमंत्री डॉ.पंकज भोयर ने कहा कि सामाजिक न्याय विभाग के लिए बजट में 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 50 करोड़ रुपये छात्रावास निर्माण हेतु खर्च किए जाएंगे।
साथ ही, हिंगनघाट में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य के लिए अतिरिक्त 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की गई। सांसद अमर काले ने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल जयंती या पुण्यतिथि तक सीमित न रहें, बल्कि उनके विचारों को जीवन में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा से ही उन्नति के संदेश को आगे बढ़ाते हुए हर गांव में पुस्तकालय और अध्ययन कक्ष स्थापित करने पर जोर दिया।