

Wardha Goras Bhandar Milk Price: वर्धा जिले में महंगाई के बढ़ते असर से गरीब और आम परिवारों का घरेलू बजट पहले ही प्रभावित है। अब दूध के दामों में भी प्रति लीटर 5 से 10 रुपए तक की बढ़ोत्तरी हुई है। पशुपालकों की बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए दूध के खरीद भाव में वृद्धि की मांग जोर पकड़ रही है।
निजी दूध विक्रेताओं ने बढ़े हुए खर्च को ध्यान में रखते हुए प्रति लीटर 10 रुपए तक की दरवृद्धि की है। मदर डेयरी, शासकीय उपक्रमों के तहत संचालित संस्थाओं, गोरस भंडार तथा अन्य दुग्ध व्यवसायियों पर भी दूध के दाम बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है।
वर्धा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों किसान खेती के साथ गोपालन को सहायक व्यवसाय के रूप में करते हैं। दूध उत्पादन से उन्हें नियमित आर्थिक आधार मिलता है। वर्तमान में विभिन्न संस्थाओं और डेयरियों द्वारा किसानों से 42 से 50 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध खरीदा जा रहा है।
हालांकि, चारा, पशुखाद्य, मजदूरी, दवाइयों और परिवहन खर्च में लगातार वृद्धि होने से पशुपालकों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसलिए किसान दूध के खरीद भाव में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। कुछ निजी दूध विक्रेताओं ने 10 रुपए तक की दरवृद्धि की है।
वर्धा जिले में दूसरी ओर, शासकीय उपक्रमों और कुछ डेयरियों में अब भी पुराने भाव पर ही किसानों से दूध खरीदा जा रहा है। इसके चलते कई दूध उत्पादक अन्य माध्यमों से दूध बेचने लगे हैं। इसका असर दुग्ध संकलन और बिक्री का नेटवर्क संचालित करने वाली संस्थाओं पर भी पड़ रहा है। ऐसे में आगामी 15 सितंबर तक सभी प्रमुख दूध बिक्री संस्थाओं द्वारा दरों में वृद्धि किए जाने के संकेत मिल रहे हैं।
इस वर्ष अब तक अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण चारे की कमी की स्थिति पैदा हो गई है। पशुपालकों को दूसरे राज्यों से चारा मंगाना पड़ रहा है। वहीं, ईंधन के दाम बढ़ने से परिवहन खर्च में भी वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर पशुपालकों की लागत पर हो रहा है। गाय और भैंस को पर्याप्त मात्रा में चारा नहीं मिलने पर दूध उत्पादन प्रभावित होता है। वर्तमान में भी इसका असर देखने को मिल रहा है।
वर्धा जिले में सभी प्रकार के चारे की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। पहले 50 किलो खली का बोरा 1,300 से 1,350 रुपए में मिलता था, जो अब बढ़कर 2,200 रुपए हो गया है। मक्का चुनी का भाव 22 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 29 रुपए तक पहुंच गया है। वहीं, कुटार की कीमत 700 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 1,100 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है।
पशुपालकों पर 'दोहरी मार' एक दुधारू गाय को प्रतिदिन कम से कम चार किलो कुटार, दो से ढाई किलो खली और एक किलो मक्का चुनी देने की आवश्यकता होती है। पशुखाद्य और चारे की कीमतों में हुई भारी वृद्धि से पशुपालकों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
दूध की कीमत में प्रति लीटर 10 रुपए तक की वृद्धि होने के बाद भी उत्पादन लागत में हुई बढ़ोत्तरी के कारण मुनाफे में आई कमी पूरी तरह दूर नहीं होगी, ऐसा दूध उत्पादक किसानों का कहना है। दूसरी ओर, दूध के दाम बढ़ने से गरीब और आम परिवारों के घरेलू बजट पर भी असर पड़ेगा। पशुपालकों का कहना है कि सरकार पशुखाद्य की खरीद पर अनुदान दे, तो उन्हें राहत मिल सकती है।
गोरस भंडार, वर्धा के अध्यक्ष एड. निलेश पाटील ने कहा कि पशुखाद्य की कीमतों में भारी वृद्धि और गोपालन का बढ़ता खर्च देखते हुए दूध के दाम बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि 16 सितंबर से गोरस भंडार दूध उत्पादकों को 42 रुपए के बजाय 47 रुपए प्रति लीटर का भुगतान करेगा।
वहीं, ग्राहकों को गोरस भंडार की आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से दूध 52.50 रुपए के बजाय 60 रुपए प्रति लीटर की दर से उपलब्ध होगा, पशुखाद्य के साथ मजदूरी, दवाइयां और चारा सभी महंगे हुए हैं। अगले तीन महीनों में दूध के दाम कम होने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है। आने वाले महीनों में दूध के दाम और बढ़ने की संभावना है।