वर्धा में अगस्त में सिर्फ 6% बारिश, जलाशयों में केवल 69% पानी, खरीफ फसल पर भी संकट

Wardha Low Rainfall: वर्धा में कमजोर मानसून से जल संग्रहण घटा है। अगस्त में अब तक सिर्फ 16.2 mm बारिश हुई। खरीफ फसल, जल संकट को लेकर चिंता बढ़ी, 2025 में सभी जलाशय 100 प्रतिशत तक भर गए थे।
Water storage in Wardha affected by weak monsoon
वर्धा में कमजोर मानसून से जल संग्रहण सोर्स: नवभारत डिज़ाइन फोटो
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Wardha Low Water Storage News: वर्धा जिले में इस वर्ष मानसून की बेरुखी ने चिंता बढ़ा दी है। अगस्त माह समाप्त होने को है, लेकिन जिले के 11 बड़े और मध्यम जलाशयों में कुल जलसंचय करीब 69 प्रतिशत ही है। पिछले वर्ष जुलाई में हुई अतिवृष्टि से लगभग सभी जलाशय लबालब भर गए थे, जबकि इस बार स्थिति इसके विपरीत बनी हुई है।

जिले में वर्ष 2025 में 17 और 18 जुलाई को हुई भारी बारिश के दौरान सभी जलाशय 100 प्रतिशत तक भर गए थे। इस वर्ष मानसून ने देरी से दस्तक दी और शुरुआती दौर में कुछ बारिश होने के बाद लंबे समय से गतिविधियां कमजोर हैं। इसका सीधा असर जलाशयों के जलभंडार पर दिखाई दे रहा है।

अगस्त में बारिश का आंकड़ा बेहद कम

जून, जुलाई और अगस्त में वर्धा जिले में बारिश का आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में असमान रहा है। जून में औसतन 132.2 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो औसत का 75.9 प्रतिशत है। जुलाई में 299.8 मिमी बारिश हुई, जो औसत का 109.6 प्रतिशत रही। हालांकि अगस्त में अब तक महज 16.2 मिमी बारिश हुई है, जो औसत का सिर्फ 6 प्रतिशत है।

अगस्त में बारिश की कमी ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जलाशयों में उपलब्ध पानी पर दबाव बढ़ सकता है और भविष्य में जिले के सामने जलसंकट की स्थिति पैदा होने की आशंका है।

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खरीफ फसल पर मंडराया संकट

बारिश में देरी के कारण खरीफ फसलों की बुआई भी प्रभावित हुई थी। किसानों ने जैसे-तैसे बुआई पूरी की, लेकिन अब लंबे समय से बारिश नहीं होने से फसलों पर संकट गहराने लगा है। खेतों में नमी की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसके साथ ही बीमारी और इल्ली के प्रकोप की चिंता भी किसानों को सताने लगी है।

किसानों की नजरें अब आसमान पर टिकी हैं। समय पर बारिश नहीं हुई तो सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में फसल को नुकसान हो सकता है। यदि मानसून ने जल्द जोर नहीं पकड़ा तो कम जलसंचय का असर सिंचाई, खरीफ उत्पादन और आगामी गर्मी में पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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