किसानों को उपलब्ध कराएं स्ट्रेट लाइन बीज, विजय जावंधिया का प्रधानमंत्री को पत्र, कीमतों पर उठाए सवाल
वरिष्ठ किसान नेता विजय जावंधिया ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कपास उत्पादक किसानों की समस्याओं को उठाया है। उन्होंने महंगे बीजों की कीमतों पर चिंता जताते हुए सरकार से पारदर्शिता और राहत की मांग की है।
Wardha News: वरिष्ठ किसान नेता विजय जावंधिया ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देश के कपास उत्पादक किसानों की समस्याओं को उठाया है. किसान नेता ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता लाई जाए और किसानों को महंगे बीजों से राहत दिलाई जाए. उन्होंने कहा कि स्ट्रेट लाइन कपास बीज विकसित कर उपलब्ध कराने से किसानों की लागत कम होगी और वे निजी कंपनियों पर निर्भरता से मुक्त हो सकेंगे. अंत में उन्होंने सरकार से राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने की अपील की, ताकि देश के कपास उत्पादक किसानों को न्याय मिल सके.
उन्होंने भारत और पाकिस्तान में कपास बीज की कीमतों में भारी अंतर को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इसे किसानों के साथ अन्याय बताया है. पत्र में जावंधिया ने कहा कि पाकिस्तान में किसानों को तीन जीन Cry1Ac Cry2Ab Cp4EPSPS युक्त कपास बीज लगभग 400 रुपये प्रति किलो भारतीय मुद्रा में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि भारत में किसानों को केवल दो जीन Cry1Ac Cry2Ab वाले बीटी कपास बीज के लिए करीब 2000 रुपये प्रति किलो 450 ग्राम पैकेट चुकाने पड़ रहे हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पाकिस्तान में Cryto 2033 कपास बीज 5 किलो के लिए 5885 रुपये तथा CKC 6 पिंक बॉलवर्म फ्री एवं ग्लाइफोसेट सहनशील बीज 6335 रुपये में उपलब्ध है. साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि विनिमय दर के अनुसार पाकिस्तान का 1 रुपया भारत के लगभग 3 रुपये के बराबर माना जाता है, जिससे वहां बीज और भी सस्ता पड़ता है.
11 साल बाद भी नहीं आई कोई प्रगति
जावंधिया ने याद दिलाया कि उन्होंने 5 जून 2015 को भी सरकार को पत्र लिखकर भारत में कपास का स्ट्रेट लाइन सीधी किस्म बीज उपलब्ध कराने की मांग की थी. उस समय 19 अगस्त 2015 को जवाब मिला था कि ऐसा बीज विकसित किया जा सकता है, लेकिन 11 साल बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में निजी बीज कंपनियों के दबाव के कारण किसानों को महंगे संकर हाइब्रिड बीज खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है. साथ ही यह भी चर्चा है कि किसानों को F1 की जगह F2 बीज दिए जा रहे हैं, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हो सकता है. 25वर्धा विजय जावंधिया01
