ठेकेदार की लापरवाही से वर्धा में कारंजा के वैकल्पिक रस्ते बहा, 7 गाओं से टुटा संपर्क

Wardha Roads Washed Away: कारंजा तहसील में खडक नदी पर निर्माणाधीन पुल का वैकल्पिक मार्ग तेज बारिश में बह गया। 7 गांवों का संपर्क टूटा, किसानों को 25-30 किमी अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।
River Roads Washed Away In Wardha
कारंजा में बहे पूल की तस्वीर (सोर्स- फोटो नवभारत)
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River Roads Washed Away In Wardha: वर्धा जिले के कारंजा-घाडगे तहसील के सावरडोह स्थित खड़क नदी पर निर्माणाधीन पुल के पास बनाया गया वैकल्पिक मार्ग तेज बारिश और नदी में आए उफान के कारण बह गया है। इसके चलते सावरडोह, बेलगांव, सुसुंदरा, माणिकवाड़ा और खापरी सहित सात गांवों का कारंजा से संपर्क पूरी तरह कट गया है। प्रशासन को नई वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने में दो से तीन दिन लगने की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों, विद्यार्थियों और दुग्ध व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

जानकारी के अनुसार, सावरडोह नदी पर नए पुल का भूमिपूजन लगभग एक वर्ष पूर्व किया गया था। यह मार्ग कारंजा को साहूर रोड से जोड़ता है और लंबे समय से क्षेत्र के लोगों की प्रमुख मांग रहा है। क्षेत्र के विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए प्रतिदिन कारंजा आते-जाते हैं, वहीं किसान भी कृषि कार्यों और अन्य आवश्यकताओं के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पुराने पुल की ऊंचाई कम होने के कारण हर वर्ष बारिश के मौसम में पुल पर सात से आठ फीट तक पानी बहता था। इससे विद्यार्थियों और किसानों को कई घंटों तक पुल से पानी उतरने का इंतजार करना पड़ता था। किसी मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाने की स्थिति में भी लोगों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता था। लंबे संघर्ष और आंदोलनों के बाद नए पुल को मंजूरी मिली और करीब तीन माह पहले इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था।

लापरवाही और धीमी कार्यगति का आरोप

हालांकि यह पुल मई माह तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन ठेकेदार की कथित लापरवाही और धीमी कार्यगति के कारण निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। निर्माण कार्य के दौरान आवागमन जारी रखने के लिए खेतों के किनारे एक वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था, जो अब नदी के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया है। इस घटना के बाद क्षेत्र के किसानों को खरीफ सीजन की बुआई के लिए बीज और कृषि सामग्री लाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें कारंजा पहुंचने के लिए अब 25 से 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।

सरपंच ने ठेकेदार को ठहराया जिम्मेदार

सावरडोह के सरपंच नीलेश मरसकोल्हे ने कहा कि वर्षों से कम ऊंचाई वाले पुल के कारण बारिश में गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती थीं। जनआंदोलन के बाद नया पुल मंजूर तो हुआ, लेकिन ठेकेदार ने कार्य में अत्यधिक देरी की। यदि पुल का निर्माण समय पर पूरा हो जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। निर्माणाधीन पुल अधूरा है और वैकल्पिक मार्ग भी बह जाने से सात गांवों का संपर्क कारंजा गांव से टूट गया है, जिससे किसानों और विद्यार्थियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसे सुचारू होने में अभी दो से तीन दिन का समय लग सकता है।

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