

Bombay High Court Verdict Parrot Crop Damage: मुंबई उच्च न्यायालय (बॉम्बे हाईकोर्ट) की नागपुर पीठ ने एक अभूतपूर्व फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती। अदालत ने वर्धा जिले के एक 70 वर्षीय किसान, महादेव डेकाटे, के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को उनके अनार के बाग को तोतों द्वारा पहुंचाए गए नुकसान का मुआवजा देने का आदेश दिया है। 10 साल के लंबे इंतजार के बाद किसान को मिला यह न्याय महाराष्ट्र के अन्य किसानों के लिए एक बड़ी नजीर बन गया है।
यह मामला मई 2016 का है, जब वर्धा जिले के हिंगी गांव में रहने वाले महादेव डेकाटे के अनार के बाग पर पास के वन्यजीव अभ्यारण्य से आए जंगली तोतों ने हमला कर दिया था। तोतों ने करीब 200 पेड़ों पर लगे अनारों को कुतर कर पूरी तरह नष्ट कर दिया था। जब किसान ने मुआवजे की गुहार लगाई, तो प्रशासन ने उसे ठुकरा दिया, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में एक अजीबोगरीब दलील दी। सरकार का कहना था कि सरकारी संकल्प (GR) के अनुसार, मुआवजा केवल तभी दिया जा सकता है जब नुकसान 'जंगली हाथी' या 'जंगली गाय' जैसे बड़े जानवरों द्वारा किया गया हो। सरकार ने दावा किया कि नियमों में तोतों द्वारा किए गए नुकसान के लिए मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है।
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और निवेदिता मेहता की पीठ ने सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तोते 'वन्यजीव' की श्रेणी में आते हैं। यदि संरक्षित प्राणियों द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई सरकार नहीं करेगी, तो किसान अपनी फसल बचाने के लिए वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले हिंसक रास्ते अपनाएंगे, जिससे वन्यजीव संरक्षण का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।"
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि महादेव डेकाटे को उनके 200 पेड़ों के नुकसान के लिए 200 रुपये प्रति पेड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए। हालांकि मुआवजे की राशि बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन इस फैसले ने कानूनी रूप से यह स्थापित कर दिया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा की कीमत किसानों को अपनी मेहनत की फसल गंवाकर नहीं चुकानी पड़ेगी।
यह फैसला उन हजारों किसानों के लिए आशा की किरण है जिनके खेत जंगल के पास हैं और जो अक्सर छोटे वन्यजीवों (जैसे बंदर, तोते या हिरण) द्वारा फसल की बर्बादी का सामना करते हैं, लेकिन नियमों की पेचीदगियों के कारण मुआवजे से वंचित रह जाते हैं।