

Wardha Collectorate Attachment Notice: वर्धा जिले में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा और ब्याज नहीं दिए जाने पर न्यायालय के आदेश से मंगलवार, 25 अगस्त को जिला कलेक्ट्रेट की कुर्की की नौबत आ गई।
न्यायालय के आदेश की अमलदारी के लिए याचिकाकर्ता और न्यायालयीन बेलीफ के कलेक्ट्रेट पहुंचते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। मामले को सुलझाने के लिए अधिकारियों और याचिकाकर्ता के बीच दिनभर बातचीत और गहमागहमी चलती रही।
सुधाकर कृष्णराव उमाटे और कमलाकर कृष्णराव उमाटे की 22 आर जमीन वर्ष 2002 में सेवाग्राम-दत्तपुर मार्ग के लिए अधिग्रहित की गई थी। उस समय उन्हें जमीन के मुआवजे के रूप में 55 हजार रुपये दिए गए थे। मुआवजा कम होने का दावा करते हुए उमाटे ने न्यायालय की शरण ली।
दोनों पक्षों की दलीलें और सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने उमाटे के पक्ष में फैसला सुनाया, न्यायालय के फैसले के बावजूद बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं मिलने पर उमाटे ने दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद वर्धा स्थित चौथे दिवानी न्यायालय (वरिष्ठ स्तर) ने जिला कलेक्ट्रेट की सामग्री कुर्क करने के आदेश जारी किए।
इसी आदेश की अमलदारी के लिए उमाटे और न्यायालयीन बेलीफ सुशील मानवटकर मंगलवार सुबह करीब 11.30 बजे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्ट्रेट की कुर्की होने की खबर परिसर में फैलते ही अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मच गई। मामले की जानकारी जिलाधिकारी वान्मथी सी। को दी गई।
उन्होंने तत्काल नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश उपजिलाधिकारी संजीव जाधवर को दिए। जाधवर ने न्यायालय के आदेश और उमाटे का पक्ष समझा। इसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता एकनाथ टिकले को भी बुलाया गया। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों, न्यायालयीन बेलीफ और उपजिलाधिकारी जाधवर के बीच काफी देर तक चर्चा चली।
अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान उमार्ट मुआवजे की राशि तत्काल दिए जाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद जिला प्रशासन ने न्यायालय का रुख किया और उमाटे को मुआवजा अदा करने के लिए 4 सितंबर तक का समय देने का अनुरोध किया। न्यायालय ने प्रशासन की मांग स्वीकार कर समय बढ़ा दिया। इसके साथ ही जिला कलेक्ट्रेट पर कुर्की की कार्रवाई फिलहाल टल गई।