वर्धा में बाल विवाह पर क्रैकडाउन: 8 साल में 120 शादियां रुकवाई, दोषियों को जेल और जुर्माने की चेतावनी

Wardha Child Marriage: वर्धा जिले में बीते 8 वर्षों में 120 बाल विवाह रोककर 13 FIR दर्ज की गईं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह गैर-जमानती अपराध है, जिसमें जेल व जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।
Wardha Child Marriage Prevention
बाल विवाहसोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • वर्धा जिले में 2019-20 से 30 सितंबर 2026 तक बाल विवाह की 120 शिकायतें मिलीं।

  • विभाग के अनुसार, सभी 120 मामलों में बाल विवाह रोकने में सफलता मिली।

  • बाल विवाह से जुड़े 13 अपराध विभिन्न वर्षों में दर्ज किए गए।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसेवकों और आंगनवाड़ी सेविकाओं को रोकथाम की जिम्मेदारी दी गई है।

Wardha Child Marriage Prevention: वर्धा जिले में बाल विवाह रोकने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों के तहत पिछले आठ वित्तीय वर्षों में कुल 120 बाल विवाह रोके गए हैं। वहीं, इन मामलों के संबंध में 13 अपराध दर्ज किए गए हैं।

जिला महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 30 सितंबर 2026 तक जिले में बाल विवाह की 120 शिकायतें प्राप्त हुई और सभी मामलों में बाल विवाह रोकने में सफलता मिली।

जानकारी के मुताबिक, बाल विवाह से संबंधित 13 अपराध विभिन्न वर्षों में दर्ज किए गए। वर्ष 2020-21 में हिंगणघाट में 3, वर्ष 2021-22 में देवली, आर्ची और सेलू में कुल 3 तथा वर्ष 2023-24 में आर्वी और वर्धा में कुल 4 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2025-26 में सेलू में 2 और वर्ष 2026-27 में वर्षों में 1 मामला दर्ज किया गया। वर्ष 2019-20 और 2024-25 में कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ।

बाल विकास अधिकारी तृप्ति चव्हाण के अनुसार

बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसेवकों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी तथा आंगनवाड़ी सेविकाओं को सहायक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। शहरी क्षेत्रों में पर्यवेक्षिकाओं को सहायक अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। बाल विवाह की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर समय रहते विवाह रोकने के लिए कार्रवाई की जा सकती है।

वर्धा जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस विभाग, चाइल्डलाइन, स्वराज्य मित्र संस्था, ग्रामीण मुक्ति ट्रस्ट और अन्य संबंधित संस्थाओं के माध्यम से बालकों एवं बालिकाओं से जुड़े मामलों को बाल कल्याण समिति, वर्धा के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तृप्ति चव्हाण के अनुसार उपलब्ध आंकड़े बाल विवाह रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हैं। बाल विवाह की रोकथाम के लिए अभिभावकों और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समय पर सूचना देना भी आवश्यक है।

वर्धा में बाल विवाह शिकायत के आकंड़े

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बाल विवाह कराना गैर-जमानती अपराध

कानून के अनुसार, विवाह के समय लड़की की आयु 18 वर्ष से कम या लड़के की आयु 21 वर्ष से कम होने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, बाल विवाह कराने, उसका आयोजन करने या उसे प्रोत्साहित करने के दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों सजाओं का प्रावधान है।

बाल विवाह में सहयोग करने वाले माता-पिता, अभिभावक, रिश्तेदार, मित्र, विवाह समारोह संपन्न कराने वाले व्यक्ति तथा आयोजन में मदद करने वाले अन्य संबंधित लोगों पर भी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

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