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बोर टाइगर रिजर्व का नया प्लान: जानवरों को जंगल में ही पानी-चारा मिलेगा, बाघों का बसेरा भी होगा सुरक्षित
Bor Tiger Reserve Summer Management: बोर टाइगर रिजर्व की अनूठी पहल। वन्यजीवों के लिए जलाशय किनारे बिछाया चारे का जाल। घास के जैविक प्रबंधन से बाघों का दिखना होगा आसान, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।
- Written By: प्रिया जैस

बोर प्रकल्प में घास का जैविक प्रबंधन (सौजन्य-नवभारत)
Bor Dam Wildlife Fodder: गर्मियों के दिनों में वन्यजीवों को भटकना नहीं पड़ना चाहिए़ शाकाहारी जानवरों को प्राकृतिक जलाशय के क्षेत्र में ही ताजा हरा चारा उपलब्ध हो, और मांसाहारी जानवरों का जंगल क्षेत्र में गर्मियों के दिनों में निवास बना रहे ताकि जंगल पर्यटन को भी बढ़ावा मिले, इस उद्देश्य से बोर बाघ परियोजना प्रशासन ने बोर बाघ परियोजना के कोर क्षेत्र में बोर जलाशय के क्षेत्र में घास का जैविक प्रबंधन करने का निर्णय लिया और वास्तविक कार्य शुरू किया।
अब तक इस उपक्रम के एक भाग के रूप में घास काटकर डेढ़ किमी क्षेत्र में 20 मीटर की पट्टियां बनाई गई हैं। सेलू तहसील का बोर टाइगर रिजर्व पर्यटकों को हमेशा आकर्षित करता है। यहां की जैव विविधता देखने के साथ-साथ बाघ दर्शन के लिए जिले और जिले के बाहर के पर्यटक इस टाइगर रिजर्व का भ्रमण करते हैं।
वर्तमान में जंगल सफारी के लिए आने वाले पर्यटकों को इस टाइगर रिजर्व में बोर की रानी कैटरीना और उसके दो नर बछड़ों का दर्शन हो रहा है। इस वजह से पर्यटकों का बोर टाइगर रिजर्व के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। करीब 13,800 हेक्टेयर के कोर और 68,814.46 हेक्टेयर के बफर क्षेत्र वाले बोर बाघ परियोजना में गर्मियों में वन्यजीवों के पानी की तलाश में होने वाले भटकाव को रोकने के लिए कुल 64 कृत्रिम जलाशय बनाए गए हैं।
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बोर टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बोर जलाशय सबसे बड़ा प्राकृतिक जलाशय है। इसी जलाशय के आसपास कुछ वर्षों पहले खस (फोर्ब) प्रजाति की घास की बुवाई की गई थी। वर्तमान में वह क्षेत्र घास से घना हो चुका है।
वन्यजीवों के लिए लाभकारी उपक्रम
2024 की गर्मियों में वन्यजीवों के हित को ध्यान में रखते हुए बोर बाघ परियोजना के कोर क्षेत्र में बोर जलाशय के आसपास 1 किमी तक घास का जैविक प्रबंधन कर 20 मीटर के पट्टे बनाएं गए थे़ इसका बड़ा लाभ वन्यजीवों को हुआ था। इसके आधार पर 2025 की गर्मियों में 3 किमी क्षेत्र में घास का बायोमास प्रबंधन कर 20 मीटर की पट्टियां बनाई गईं।
उस समय भी यह उपक्रम वन्यजीवों के लिए लाभकारी साबित हुआ। इसलिए इस वर्ष गर्मियों में भी बांध क्षेत्र के 10 किमी में से 8 किमी पर्यटन ट्रैक के लगभग 5 किमी क्षेत्र में 20 मीटर चौड़ी सीधे पट्टियां बनाने का बोर टाइगर रिजर्व का इरादा है। वर्तमान स्थिति में लगभग डेढ़ किमी क्षेत्र में घास का बायोमास प्रबंधन करके 20 मीटर के पट्टे बनाएं जा चुके हैं।
यह भी पढ़ें – अशोक खरात का पैर धोने वाली रूपाली चाकणकर ने दिया इस्तीफा, CM फडणवीस ने सफाई सुनने से किया इनकार
बोर जलाशय क्षेत्र की स्थिति :
- 10 किमी क्षेत्र घास से ढका हुआ है
- 8 किमी क्षेत्र पर पर्यटन ट्रैक है
- 5 किमी क्षेत्र में इस वर्ष पट्टे बनाने का लक्ष्य
बायोमास प्रबंधन वन्यजीवों के लिए लाभकारी
बायोमास प्रबंधन वन्यजीवों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। बोर बाघ परियोजना के अधिकारियों के निरीक्षण में सामने आया कि घास का जैविक प्रबंधन करने पर शाकाहारी जानवरों को गर्मियों में जंगल क्षेत्र में ही ताजा हरा चारा उपलब्ध होता है। साथ ही बायोमास प्रबंधन से जंगल सफारी के लिए आने वाले नागरिकों को घास में छुपे वन्यजीवों का दर्शन भी होता है। इस कारण बायोमास प्रबंधन जंगल पर्यटन को बढ़ावा देने वाला साबित हो रहा है।
Bor tiger reserve biomass grass management wildlife conservation summer
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