आष्टी तहसील में बारिश का कहर: नरसिंगपुर में बाढ़, किसानों की फसलें तबाह

Ashti Flood : आष्टी तहसील में मूसलाधार बारिश के बाद नरसिंगपुर सहित कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। बाकली नदी में आई बाढ़ से 12 बकरियां बह गईं, 13 मवेशियों की मौत हुई।
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Bakli River Flood (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Ashti Heavy Rain: आष्टी तहसील में हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। लगातार हुई तेज बारिश से आष्टी शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए, नरसिंगपुर गांव सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां बाकली नदी में आई बाढ़ से 12 बकरियां बह गईं, जिला परिषद प्राथमिक स्कूल जलमग्न हो गया तथा किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बताया जा रहा है कि नगर पंचायत द्वारा समय पर नालों की सफाई नहीं किए जाने से शहर की गजानन नगरी क्षेत्र में पानी भर गया।

वहीं, नरसिंगपुर में बाकली नदी पर बने कोल्हापुरी बांध की समय पर सफाई नहीं होने तथा सिंचाई विभाग द्वारा गेट नहीं खोले जाने के कारण बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी का प्रवाह बाधित होने से पूरे गांव को बाढ़ के पानी ने घेर लिया। बाढ़ के दौरान पशुपालक अनिकेत कोहरे की 12 बकरियां पानी में बह गईं। इनमें से चार बकरियां मृत अवस्था में मिलीं, जबकि अन्य बह गई। अचानक आई बाढ़ के कारण उन्हें पशुओं को बचाने का मौका भी नहीं मिल सका, जिससे उनका भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

आष्टी के नरसिंगपुर में बाढ़ से तबाही

घटना की जानकारी मिलते ही तहसीलदार ऐश्वर्या गिरी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक राहत एवं बचाव कार्य के निर्देश दिए तथा नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग पर समय पर बंधारे के गेट नहीं खोलने का आरोप लगाते हुए नाराजगी व्यक्त की और नुकसान की भरपाई की मांग की। बाढ़ से नरसिंगपुर गांव का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

प्रशासन ने शुरू किया राहत कार्य

लोगों में भय का माहौल है तथा प्रशासन से तत्काल राहत एवं मुआवजे की मांग की जा रही है। निरीक्षण के दौरान नगराध्यक्ष अनिल धोत्रे, - पटवारी भारती चव्हाण, हसीब शेख, पशुसंवर्धन सहायक आयुक्त डॉ. डी.एस. पाटिल, पर्यवेक्षक भालचंद्र जाने, मुख्याध्यापक केशव चौरेवार, नगर पंचायत अभियंता विवेक पाटिल, स्वच्छता निरीक्षक रमेश चाफले सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

व्यापक नुकसान-स्कूल सामग्री व रिकॉर्ड हुआ खराब

नरसिंगपुर स्थित जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय में भी बाढ़ का पानी घुस गया। स्कूल की सभी कक्षाएं जलमग्न हो गई, जिससे नई पाठ्यपुस्तकें विद्यार्थियों की कॉपियां, शाला का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तथा खाद्यान्न पूरी तरह भीग गया। विद्यालय परिसर से लगी राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज अव्ययनिका में भी पानी घुसने से वहां रखी पुस्तके खराब हो गई। इससे शैक्षणिक नुकसान की भी आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा पुराने बस स्टैंड स्थित रविद्र निम्बेकर की वेल्डिंग दुकान तथा अंकुश शिरभाते की इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान में भी बाढ़ का पानी घुसने से सामान को भारी नुकसान पहुंचा।

खेतों में घुसा बाढ़ का पानी

इधर, आष्टी ग्रामीण क्षेत्र के धाड़ी और लहान आवीं गांवों में भी भारी नुकसान हुआ है। लहान आवीं ग्राम पंचायत अंतर्गत सुजातपुर में वन विभाग के नालों का पानी खेतों में घुसने से रविद्र हमाणे, राजेंद्र चरडे, गोपाल चरडे और संजय चरडे की फसलें बर्बाद हो गई, धाड़ी क्षेत्र में भी कई किसानों की कृषि भूमि और फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ की भेंट चढ़े 13 मवेशी

बाकली नदी में आयी बाढ़ से तहसील के देवगांव परिसर में हाहाकार मच गया। नदी के बहाव में ममदापुर स्थित पशुपालक नामदेव पडधान की चार भैसे, दो बैल व सात गाय लगभग 13 मवेशियों की मौ हो गई कुछ मवेशियों का तो पता भी नहीं चला प्रकृति के इस कहर से पशुपालकों का लाख रुपयों का नुकसान बताया गया पीड़ितों ने प्रशासन से नुकसान भरपाई की मांग की है।

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