वालधुनी नदी के पानी की दुर्गंध से परेशान है लोग, हर दिन बदलता है पानी का रंग

Valdhuni River Pollution: ठाणे जिले के अंबरनाथ, उल्हासनगर और कल्याण से गुजरने वाली वालधुनी नदी गंभीर प्रदूषण का शिकार हो गई है, जहां केमिकल अपशिष्ट, अवैध निर्माण और सीवेज के कारण पानी का रंग बदल रहा।
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Valdhuni River (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Ulhasnagar River Issue: ठाणे जिले के प्रमुख शहरों अंबरनाथ, उल्हासनगर और कल्याण से होकर बहने वाली वालधुनी नदी का पानी लंबे समय से रंग बदलते रहता है। भीषण गर्मी के दिनों में प्रदूषण का मुद्दा तब सामने आया जब नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले निवासियों ने इलाके से तेज दुर्गंध आने का अनुभव किया। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर, वालधुनी नदी स्वच्छता के मुद्दे को लेकर कार्यरत एक एनजीओ द्वारा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी उपेंद्र कुलकर्णी और कल्याण के एमपीसीबी बोर्ड के अधिकारियों के साथ एक बैठक की।

इस बैठक के बाद संबंधित अधिकारियों ने नदी का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने पर सहमति जताई। तदनुसार पिछले दो दिनों से नदी के जल की गुणवत्ता की जांच के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के लिए आवश्यक उपकरण महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। निरीक्षण दौरे के दौरान वालधुनी को स्वच्छ नदी बनाने की लड़ाई लड़ रहे शशिकांत दयामा, रेखा अतरड़े, दीपाली आमदोस्कर और सुरेखा दिविलकर ने किया।

केमिकल कंपनियों तथा नागरिकों के कारण नदी ने ले लिया है नाले का रूप

निरीक्षण एवं अवलोकन अभियान का नेतृत्व वालधुनी नदी स्वच्छता सेवा संगठन के अध्यक्ष सुनिल उतेकर ने किया। संस्था के अध्यक्ष सुनील उतेकर, साथ ही भारती अय्यर, गणेश कांबले, अनिल सरदार, सुरेश अहिरे और विशंत कांबले जैसे प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे और उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। सरकार ने नदी को प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प लिया।निरीक्षण दौरे के बाद वालधुनी नदी के तल में घटना स्थलों का सर्वेक्षण किया गया और एक पूर्ण रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों और महाराष्ट्र सरकार को सौंपी जाएगी।

वालधुनी नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध

इसके अलावा कल्याण- डोंबिवली मनपा के अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक संयुक्त बैठक जल्द ही आयोजित की जाएगी और संबंधित अधिकारियों को इसमें आमंत्रित किया जाएगा। कल्याण में आयोजित बैठक के अवसर पर बोलते हुए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी उपेंद्र कुलकर्णी ने आश्वासन दिया कि हम वालधुनी नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वालधुनी नदी जो मलंगगढ़ पर्वत श्रृंखला के काकोले गांव से निकलती है और आशेले, मानेरे, वसार से होते हुए कैलाशनगर, सह्याद्रीनगर, खडेगोलावली, अशोकनगर, शिवाजीनगर, शहद, घोलपनगर, योगीधाम तक बहती है। नदी इसी मार्ग से कल्याण खाड़ी में मिलती है। इस नदी के किनारे बड़े पैमाने पर शहरीकरण हुआ है। साथ ही, छोटे-बड़े उद्योगों का अपशिष्ट बिना किसी प्रक्रिया के नदी में बहाया जाता है। इसी को देखते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय में शिकायतें दर्ज की गई हैं। महाराष्ट्र की 42 प्रदूषित नदियों में से वालधुनी नदी सबसे प्रदूषित मानी जाती है। इस नदी का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है दुःख बात यह है कि वालधुनी का पानी जानवर तक नहीं पीते है।

नाले में तब्दील हो चुकी नदी

नदी नाले में तब्दील हो चुकी है, नदी के दोनों किनारों पर अनगिनत अवैध निर्माण हो चुके हैं। इस वजह से नदी का किनारा संकरा हो गया है। हर मानसून में भारी बारिश के बाद नदी के किनारे बसे लोगों के घरों में पानी भर जाता हैं। नदी के निचले स्तर को ध्यान में रखे बिना निर्माण परमिट जारी कर दिए गए हैं। इन सभी कारणों से यह स्पष्ट हो गया है कि यह नदी अब अस्तित्व में नहीं है। उदासीनता के कारण पिछले कुछ वर्षों में वालधूनी नदी एक नाले में तब्दील हो गई है।

नदी के किनारे स्थित रसायनिक कारखानों, कपड़ा और जींस प्रसंस्करण उद्योगों और कुछ अन्य परियोजनाओं ने रसायनिक और सीवेज युक्त अपशिष्ट जल नदी में बहा दिया जाता है, जिससे नदी पूरी तरह प्रदूषित हो गई है। भू-माफियाओं ने विभिन्न स्थानों पर नदी तल पर अतिक्रमण कर लिया है। राजनेताओं और संबंधित विभागों के अधिकारियों के प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष समर्थन से वालधूनी नदी का अस्तित्व खतरे में है।

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