

Ulhasnagar BJP Boycott News: उल्हासनगर मनपा में भाजपा तथा शिंदे शिवसेना का गठबंधन सत्ता में साथ साथ है, लेकिन शुक्रवार को आयोजित उल्हासनगर मनपा की महासभा में भाजपा तथा शिवसेना के बीच की टकराहट खुले तौर पर देखने को मिली। मनपा में भाजपा के गट नेता राजेश वधारिया के नेतृत्व में सभा में उपस्थित भाजपा के नगरसेवकों में यह कहते हुए महासभा का बहिष्कार किया कि जब आप लोग महासभा का एजेंडा बनाने में अपनी ही चलाते हो तो मीटिंग में भाजपा के सदस्यों का बैठना उचित नहीं है, मनमानी काम का हम समर्थन नहीं करेंगे। भाजपा के इस फैसले से शहर में राजनीतिक माहौल गरमा गया।
भाजपा के सभी पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार किया और हॉल से बाहर चले गए। भाजपा के गट नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा को विश्वास में लिए बिना कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें विपक्ष के नेता के रूप में कांग्रेस की अंजली सालवे का चयन किया जाना, मनपा की लाडली विद्यार्थिनी योजना का नाम देने तथा शहर विकास के काम के मुद्दे को निर्धारित करते समय शिवसेना द्वारा भाजपा को भरोसे में न लिए जाने का मुद्दा भी शामिल है।
इस विरोध के कारण भाजपा पार्षदों ने बैठक से बाहर जाने का फैसला किया। भाजपा पार्षदों के बाहर जाने के बाद, केवल शिवसेना (शिंदे समूह) के पार्षदों ने ही बैठक में अपना पक्ष रखा। इस हंगामे के बावजूद, फेरीवालों के लिए क्षेत्र निर्धारण, क्लस्टर योजना और झुग्गी-मुक्त योजना जैसे प्रमुख मुद्दों पर गरमागरम बहस हुई।
उक्त बैठक में पर्यावरण विभाग और क्लस्टर योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्षद जमनु पुरसवानी ने सुझाव दिया कि इस क्लस्टर योजना को पैनल संख्या 10 में खन्ना कंपाउंड, पैनल संख्या 9 में सुभाष नगर और पैनल संख्या 2 में मुकुंद नगर और गुलशन नगर में झुग्गी-मुक्त योजना के अंतर्गत लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शहर में पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण, नदी सफाई, भूजल संरक्षण और वायु शुद्धिकरण जैसे विभिन्न स्तरों पर कार्य चल रहे हैं। 'ग्रीन यात्रा' अभियान के तहत एंटिलिया क्षेत्र के पास 10 हजार पेड़ लगाए जा चुके हैं। साथ ही सीएसआर फंड के माध्यम से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा।बैठक में निर्माण के दौरान धूल नियंत्रण के लिए निर्माण सामग्री को ढकने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के मुद्दों पर भी जोर दिया गया।
शहर में अवैध फेरीवालों की बढ़ती संख्या, उनके कारण होने वाले यातायात जाम और नागरिकों को होने वाली असुविधा का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। पार्षद महेश सुखरमानी ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि फेरीवालों ने शहर की कई मुख्य सड़कों और बाजारों पर कब्जा कर लिया है। इसके चलते सड़कें संकरी हो गई हैं और नागरिकों, दुकानदारों और चालकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में मांग की गई कि जिन क्षेत्रों में फेरीवालों का कारोबार प्रतिबंधित है, वहां 'फेरी लगाने पर प्रतिबंध' के स्पष्ट संकेत प्रदर्शित किए जाएं। साथ ही यह भी मांग की गई कि संबंधित विभाग अवैध फेरीवालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई करे, यातायात व्यवस्था में सुधार करे और यथाशीघ्र फेरी लगाने के लिए निर्धारित क्षेत्र की योजना बनाए। मनपा की महापौर अश्विनी निकम, उपमहापौर अमर लुंड, शिवसेना के वरिष्ठ नगरसेवक राजेंद्र चौधरी, महेश सुखरमानी, भाजपा के राजेश वधारिया, जमनू पुरस्वानी जैसे वरिष्ठ नगरसेवकों ने चर्चा में भाग लिया।