ठाणे के SDT कालानी स्कूल में शिक्षकों के लिए खास सेशन, भरोसा बढ़ाने के बताए गए 3C फॉर्मूले

3C Blueprint for Teachers: ठाणे के SDT कालानी स्कूल में लाइफ वॉचर्स ने शिक्षकों के लिए ‘3C ब्लूप्रिंट’ सेशन आयोजित किया। इसमें कनेक्शन, कम्युनिकेशन और केयर के जरिए भरोसा बढ़ाने पर जोर दिया गया।
Thane SDT Kalani School Teacher Transformation 3C Blueprint Session
3C ब्लूप्रिंट सेशन(फोटो नवभारत)
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Highlights

  • विद्यार्थियों के व्यवहार और भावनात्मक जरूरतों को समझने पर जोर दिया।

  • कनेक्शन, कम्युनिकेशन और केयर को 3C ब्लूप्रिंट का आधार बताया गया।

  • शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच आपसी समझ बढ़ाने की अपील की गई।

Thane SDT Kalani School Teacher: शिक्षकों, विद्यार्थियों और पलकों के बीच कम्युनिकेशन बढ़ाकर आपसी भरोसे के रिश्ते को मज़बूत करने के मकसद से, ‘टीचर ट्रांसफॉर्मेशन सीरीज़’ के तहत SDT कालानी स्कूल के साथ मिलकर लाइफ़ वॉचर्स ने ‘3C ब्लूप्रिंट’ टॉपिक पर एक खास गाइडेंस सेशन ऑर्गनाइज़ किया।

विद्यार्थियों के व्यवहार और भावनात्मक जरूरतों को समझने पर जोर

टीनएजर्स और पेरेंटिंग की मेंटर मेघा सक्सेना ने ठाणे जिले में हो रहे इस सेशन के दौरान शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने के लिए मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यवहार को केवल अनुशासन के नजरिए से देखने के बजाय उसके पीछे के कारणों को समझना जरूरी है।

कई बार विद्यार्थियों का व्यवहार उनकी भावनात्मक जरूरतों, परेशानियों या असुरक्षा को दर्शाता है। ऐसे में शिक्षकों को उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए और संवेदनशीलता के साथ संवाद करना चाहिए। उन्होंने भरोसेमंद माहौल बनाने पर जोर दिया, ताकि विद्यार्थी बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें और उन्हें उचित सहयोग मिल सके।

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3C ब्लूप्रिंट में कनेक्शन, कम्युनिकेशन और केयर

‘3C ब्लूप्रिंट’ के तहत शिक्षकों को कनेक्शन, कम्युनिकेशन और केयर यानी जुड़ाव, संवाद और देखभाल के तीन प्रमुख पहलुओं की जानकारी दी गई। सेशन में बताया गया कि शिक्षकों की भूमिका केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने और अनुशासन बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें भावनात्मक सहयोग देना भी जरूरी है।

विद्यार्थियों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाने के लिए उनकी बात ध्यान से सुनना, उनकी भावनाओं का सम्मान करना और बिना किसी पूर्वाग्रह के संवाद करना आवश्यक है। इससे विद्यार्थी अपनी परेशानियां खुलकर साझा कर सकेंगे और स्कूल में सकारात्मक माहौल विकसित होगा। लाइफ़ वॉचर्स की फाउंडर डॉ. रूपिंदर कौर ने कहा कि टीचरों, स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को मज़बूत बनाना आज की ज़रूरत है।

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को-फ़ाउंडर रत्नेश महाडिक और कालानी स्कूल की प्रिंसिपल लीना मनुजा ने भी एक-दूसरे की समस्याओं को समझने और एक-दूसरे पर इल्ज़ाम लगाने के बजाय सहयोग करने के महत्व पर ज़ोर दिया। यह सेशन महाराष्ट्र राज्य के टीचरों को ज़्यादा संवेदनशील और स्टूडेंट-सेंट्रिक बनाकर एक पॉज़िटिव एजुकेशनल माहौल बनाने के लिहाज़ से ज़रूरी था।

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