

पडघा पुलिस अलग-अलग जगहों पर आरोपियों की तलाश कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नरेंद्र पवार की याचिका भिवंडी कोर्ट ने खारिज कर दी।
गिरफ्तारी न होने पर आंदोलन की चेतावनी के बावजूद अब तक प्रदर्शन नहीं हुआ।
Narendra Pawar Shailesh Patil Police Search: BJP के पूर्व विधायक नरेंद्र पवार और बर्खास्त पुलिस अधिकारी शैलेश पाटिल के खिलाफ गैंग रेप केस दर्ज हुए एक महीना से अधिक हो चुका है। लेकिन अभी तक पुलिस दोनों फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने में नाकाम साबित हो रही हैं।
बता दें कि कल्याण के पूर्व BJP MLA नरेंद्र पवार और बर्खास्त पुलिस ऑफिसर शैलेश पाटिल के खिलाफ कथित गैंग रेप केस दर्ज हुए एक महीने से ज़्यादा समय बीत चुका है। एंटीसिपेटरी बेल एप्लीकेशन खारिज होने के बाद भी दोनों का पता नहीं चल पाया है।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या आरोपियों को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है क्योंकि वे सत्ताधारी BJP शिवसेना पार्टी के पूर्व MLA हैं या फिर इसलिए कार्रवाई नहीं की जा रही है क्योंकि वे मुख्यमंत्री के करीबी हैं?
भाजपा के पूर्व नरेंद्र पवार के खिलाफ कथित गैंग रेप केस दर्ज हुए एक महीने से ज़्यादा समय बीत चुका है। हालांकि, जानकारी सामने आई है कि नरेंद्र पवार और बर्खास्त पुलिस ऑफिसर शैलेश पाटिल का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पडघा पुलिस ने दोनों की तलाश के लिए छह टीमें लगाई गई हैं और अलग-अलग जगहों पर सर्च ऑपरेशन चल रहा है।
फिर भी जब आरोपी नहीं मिले हैं, तो जांच की प्रोग्रेस पर सवाल उठ रहे हैं। पडघा पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर पंकज गिरी की दी गई जानकारी के मुताबिक मामले की जांच चल रही है और नरेंद्र पवार को ढूंढने के लिए पुलिस की छह टीमें काम कर रही हैं। लेकिन अभी तक उनका कोई पता नहीं चला है।
कल्याण पश्चिम की एक शादीशुदा महिला ने उन पर मदद के बहाने भिवंडी के बापगांव फार्महाउस पर ले जाने और सामूहिक दुषकर्म करने का आरोप लगाया है। इस महिला की शिकायत के बाद पडघा पुलिस स्टेशन में पूर्व BJP MLA नरेंद्र पवार और बर्खास्त पुलिस अधिकारी शैलेश पाटिल के खिलाफ दुषकर्म का मामला दर्ज किया गया है।
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस दोनों की तलाश कर रही है। इसके लिए छह टीमें बनाई गई हैं और अलग-अलग जगहों पर जांच की जा रही है। बताया गया है कि रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट पर भी सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि दोनों अभी तक नहीं मिले हैं।
इस मामले में कांग्रेस पार्टी शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाए हुए है। कांग्रेस पार्षद कंचन कुलकर्णी ने आरोपी नरेंद्र पवार को गिरफ्तार न करने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। लेकिन एक महीने से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी कांग्रेस की तरफ़ से अभी तक कोई आंदोलन नहीं किया गया है। इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस पार्षद कंचन कुलकर्णी की भूमिका नरम पड़ गई है।
इस मामले में नरेंद्र पवार की तरफ से भिवंडी कोर्ट में एंटीसिपेटरी बेल के लिए अर्जी दी गई थी। मिली जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया है। फिर भी कहा जा रहा है कि नरेंद्र पवार और शैलेश पाटिल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। चूंकि इस मामले में एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी आरोपी नहीं मिले हैं, इसलिए पुलिस की जांच पर सवाल उठ रहे हैं।
इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि इस मामले में जांच कहां तक पहुंची है, आरोपियों को ढूंढने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। चूंकि आरोपी भारतीय जनता पार्टी का पूर्व MLA है, तो क्या इस मामले में कोई दबाव है?
लोगों लोगों द्वारा इस बात पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि मामले में जांच कहां तक पहुंची है, आरोपियों को ढूंढने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर राहुल जालटे और पडघा पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर पंकज गिरी की लीडरशिप में इस मामले में क्या एक्शन लिया जाता है।