6 घंटे में पलटी किस्मत, 24 साल का वनवास खत्म, ठाणे पुलिस की बदौलत अपनों से गले मिलीं भारती कदम

Thane Police News: ठाणे पुलिस ने मानवीय पहल दिखाते हुए 24 साल पहले परिवार से बिछड़ी भारती को उसके भाई-बहनों से मिला दिया। बाल संरक्षण कक्ष की टीम ने महज 6 घंटे में इस जटिल मामले को सुलझाया।
Bharti, separated 24 years ago, had an emotional and joyful reunion with her family
गुमशुदा मामले भारती कदम, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • ठाणे पुलिस ने 24 साल बाद बिछड़ी भारती को परिवार से मिलाया।

  • 2002 में नवी मुंबई में मामा के घर जाते समय बिछड़ गई थीं भारती।

  • शादी के बाद सोलापुर में जान्हवी वैभव झांबरे नाम से रह रही थीं।

  • पुराने रिकॉर्ड और हाथ पर गुदे नाम से मिला अहम सुराग।

Thane Police Child Protection Unit: वक्त चाहे कितना भी आगे निकल जाए और दूरियां चाहे कितनी भी बढ़ जाएं, अपनों से मिलने की तड़प मन के किसी कोने में हमेशा जीवंत रहती है। समय की आंधियां को रिश्तों नहीं धुंधला कर पातीं। ठाणे शहर से ऐसी ही एक दिल को छू लेने वाली और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां पुलिस की संवेदनशीलता ने एक परिवार के 24 सालों के अंधेरे को उम्मीद के उजाले में बदल दिया।

यह कहानी है भारती अश्रू कदम की। साल 2002 में, जब भारती बहुत छोटी थीं, तब नवी मुंबई में अपने मामा के यहां जाने के दौरान परिवार से बिछड़ गई थीं। बेलापर पुलिस को वह लावारिस हालत में मिलीं, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी उनके परिजनों का सुराग नहीं लग सका।

मजबूरन उन्हें बालगृह भेज दिया गया। समय का पहिया घूमता रहा। भारती बड़ी हुईं, उनका विवाह हुआ और उनका नाम बदलकर जान्हवी वैभव झांबरे हो गया। आज सोलापुर में उनका अपना हंसता-खेलता परिवार है। एक बेटी और एक बेटा है। भौतिक रूप से उनका जीवन संवर चुका था, लेकिन उनके दिल का एक कोना हमेशा सूना रहता था।

बचपन की यादें, माता-पिता की छांव और अपने भाई-बहनों की यादें उन्हें हर पल बेचैन करती थीं। पिछले आठ वर्षों से वे अपने स्तर पर अपने परिवार को तलाशने की अथक कोशिश कर रही थीं। दूसरी ओर, उनके भाई विजय अश्रू कदम भी अपनी खोई हुई बहन की तलाश में दिल्ली-हरियाणा तक भटक चुके थे, लेकिन निराशा ही हाथ लगी थी।

भारती के भाई के नाम से मिलता जुलता पंजीकरण मिला

आखिरकार, 8 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12 बजे भारती ने ठाणे शहर पुलिस के बाल संरक्षण कक्ष से संपर्क किया और अपनी पीड़ा साझा की। यह सिर्फ एक गुमशुदा इंसान को खोजने का मामला नहीं था, बल्कि दो दशकों से टूटे दिलों को जोड़ने का एक पवित्र प्रयास था। ठाणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में सीपीयू की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला।

पुराने पुलिस रिकॉर्ड खंगाले गए, नवी मुंबई पुलिस और बेलापुर मिसिंग सेल से समन्वय बैठाया गया। साल 2002 की पुरानी मतदाता सूचियों को खंगालते समय एक अहम सुराग मिला। भारती के भाई के नाम से मिलता जुलता पंजीकरण मिला। इसके बाद बूथ लेवल ऑफिसर की मदद से परिजनों तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ। इस पूरी तलाश में भारती के हाथ पर गुदा हुआ उनका नाम ('भारती अश्रू कदम') भी एक बहुत बड़ा आधार बना।

Bharti, separated 24 years ago, had an emotional and joyful reunion with her family
अकासा एयर का राजस्थान में हवाई सेवाओं का विस्तार: मुंबई और बेंगलुरु से जयपुर के लिए रोजाना सीधी उड़ानें शुरू

वीडियो कॉल पर जब छलके आंसू, मेरी बहन मिल गई !

ठाणे पुलिस की अद्भुत और तेजतर्रार कार्यशैली का ही नतीजा था कि महज छह घंटे के भीतर पुलिस ने भारती के भाइयों (प्रकाश और विजय) तथा बहन शालिनी का पता लगा लिया। जैसे ही वीडियो कॉल के जरिए 24 साल बाद भाई-बहनों की एक-दूसरे से नजरें मिलीं, भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

जिस बहन की याद में परिवार ने दो दशक काट दिए थे, वह आज स्क्रीन पर सामने थी। वह पल सिर्फ एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि ममता, विश्वास और अटूट मानवीय बंधनों की जीत थी। जल्द ही यह परिवार आमने-सामने मिलकर इस अधूरी मुलाकात को पूरा करेगा।

Bharti, separated 24 years ago, had an emotional and joyful reunion with her family
मुंबई में साइबर अपराध में भारी उछाल: 8 महीनों में दर्ज हुए 4,250 से अधिक मामले, 44% बढ़ी ऑनलाइन ठगी की घटनाएं

इंसानियत की मिसाल बनी ठाणे पुलिस

अपराध रोकना और कानून व्यवस्था संभालना पुलिस का दायित्व है, लेकिन किसी की उजड़ी हुई दुनिया को फिर से आबाद कर देना खाकी के भीतर धड़कते एक संवेदनशील इंसान की पहचान कराता है।

ठाणे पुलिस के इस मानवीय प्रयास ने यह साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ सुरक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि उम्मीद की आखिरी किरण भी है।

इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे ठाणे शहर के पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे, संयुक्त आयुक्त ज्ञानेश्वर चव्हाण, अतिरिक्त आयुक्त डॉ. पंजाबराव उगले, उपायुक्त अमरसिंह जाधव, विनय घोरपडे और विशेष रूप से बाल संरक्षण कक्ष की टीम (श्रेणी उपनिरीक्षक बसली शिंदे, तानाजी गायकवाड, तेजश्री शिरसाठ और सुवर्णा यादव) का अथक परिश्रम और समर्पण शामिल है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com