मॉब लिंचिंग मामले में 3 दोषियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, ठाणे में चोरी के शक में हुई थी हत्या

Thane News: ठाणे में चोरी के संदेह पर युवक की पीट-पीटकर हत्या मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को उम्रकैद सुनाई। अपराध की क्रूरता को देखते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, एक आरोपी सबूतों के अभाव में बरी।
Court Verdict
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Thane Mob Lynching Case: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वी जी मोहिते की अदालत ने भीड़ द्वारा हत्या (मॉब लिंचिंग) के एक गंभीर मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने अपराध की क्रूरता को देखते हुए तीन लोगों को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 10,000 रुपये जुर्माने की सजा दी है।

चोरी के संदेह में किया गया था हमला

यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना 6 मार्च, 2021 को भयंदर पूर्व के इंदिरा नगर इलाके में हुई थी। पीड़ित सूरजभान ओमप्रकाश सोनी (23) और एक अन्य व्यक्ति विक्की उर्फ ​​अभिषेक सिंह पर भीड़ ने चोरी के संदेह में हमला कर दिया था। इस हमले के कारण सोनी की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण मस्तिष्क में अंदरूनी रक्तस्राव और मस्तिष्क में गंभीर चोट लगना बताया गया था। अतिरिक्त लोक अभियोजक रश्मि क्षीरसागर ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष के 10 गवाहों से जिरह की गई थी।

तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वी जी मोहिते ने शुक्रवार को मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराया। दोषी पाए गए लोगों में रामतेज उर्फ ​​गव्य राम यादव (29), अमरजीत उर्फ ​​छबी बिंद्राप्रसाद गुप्ता (29) और चिराग उर्फ ​​कल्या शोभनाथ ठाकुर (31) शामिल हैं। अदालत ने तीनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 323 और 504 के तहत दोषी पाया। इन सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि, अदालत ने एक अन्य आरोपी शिवकुमार उर्फ ​​लाला बिंदर लोध को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया।

वीडियो ने उजागर की अपराध की क्रूरता

अदालत ने अपने आदेश में अपराध की गंभीरता और क्रूरता का हवाला दिया। न्यायाधीश ने कहा कि हमले के वीडियो अपराध के दौरान की गई गंभीरता और क्रूरता को दर्शाते हैं।

दोषियों द्वारा नरमी बरतने की मांग वाली दलीलों पर, न्यायाधीश ने कहा कि भले ही आरोपी युवा हैं और उनके परिवार के सदस्य उन पर निर्भर हैं, लेकिन सजा सुनाते समय अपराध के तरीके को ध्यान में रखना होगा। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आरोपियों की ओर से दी गई दलीलें नरमी बरतने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास नियम है और मृत्युदंड अपवाद है। न्यायाधीश के अनुसार, मृत्युदंड तभी दिया जाना चाहिए जब आजीवन कारावास अपर्याप्त सजा प्रतीत हो, और यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है।

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