

1993 से 84.86 लाख रुपये की अग्रिम राशि का हिसाब लंबित होने का दावा
RTI कार्यकर्ता एडवोकेट खुश खंडेलवाल ने उठाए सवाल
18% वार्षिक ब्याज सहित वसूली की मांग
मनपा आयुक्त और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा पत्र
Thane MBMC Financial Irregularities RTI Activist Advance Recovery: ठाणे जिले के मीरा-भाईंदर महानगरपालिका (MBMC) में अधिकारियों और कर्मचारियों को दी गई अग्रिम राशि का हिसाब वर्षों से लंबित होने का मामला सामने आया है। RTI कार्यकर्ता एडवोकेट खुश खंडेलवाल के अनुसार, वर्ष 1993 से अब तक कुल 84.86 लाख रुपये की अग्रिम राशि का हिसाब नहीं दिया गया है। इस जानकारी के सामने आने के बाद मनपा की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
खंडेलवाल ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से यह राशि 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वसूल की जाए। उन्होंने इस संबंध में मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा, पुलिस महानिदेशक और नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
एडवोकेट खंडेलवाल के अनुसार, मनपा अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय कार्यों के लिए दी जाने वाली अग्रिम राशि सार्वजनिक धन है। नियमानुसार, संबंधित कर्मचारी को इस राशि से किए गए खर्च का पूरा विवरण और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। खर्च के बाद बची रकम मनपा के खाते में लौटाना भी जरूरी है।
यदि अग्रिम राशि खर्च नहीं हुई है, तो उसे वापस जमा करना संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी है। ऐसे में लंबे समय तक हिसाब लंबित रहने के मामलों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई गई है।
खंडेलवाल के मुताबिक, बकाया राशि में कई साल पुराने मामले शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों में कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कुछ का दूसरे विभागों में तबादला हो गया है।
ऐसे मामलों में राशि की वसूली और जिम्मेदारी तय करना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए बकाया मामलों की अलग-अलग जांच कर संबंधित लोगों से जवाब मांगने की आवश्यकता जताई गई है।
खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि नागरिकों से टैक्स के रूप में प्राप्त धन का उपयोग शहर के विकास और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जाना चाहिए। वर्षों तक अग्रिम राशि का हिसाब नहीं देना गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत हो सकता है। उन्होंने पूरी राशि ब्याज सहित वसूलने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
अब इस मामले में मनपा प्रशासन का पक्ष और बकाया राशि की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण होगी। यह स्पष्ट होना बाकी है कि कितनी राशि का हिसाब वास्तव में लंबित है और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों से वसूली के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।