महाराष्ट्र में मानसून की सुस्ती! ठाणे प्रशासन की किसानों को सलाह, 100mm बारिश से पहले न करें खरीफ बुआई
Kharif Sowing Postponed: महाराष्ट्र में कम बारिश के चलते ठाणे जिला प्रशासन ने किसानों को खरीफ फसलों की बुआई रोकने की सलाह दी है। कृषि विभाग ने सूखे से निपटने के लिए आकस्मिक योजना तैयार की है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Kharif Crop Sowing Advisory: महाराष्ट्र में मानसून की कछुआ चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जून के शुरुआती पखवाड़े में उम्मीद से बेहद कम बारिश होने के कारण ठाणे जिला प्रशासन ने एक आधिकारिक परामर्श जारी किया है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल के नुकसान से बचने के लिए फिलहाल बुआई स्थगित कर दें।
100 मिलीमीटर बारिश होने का इंतजार करें किसान: कृषि विभाग
ठाणे के जिला कृषि अधीक्षण अधिकारी रामेश्वर पाचे ने स्थानीय किसानों से बेहद सूझबूझ से काम लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जब तक संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 100 मिलीमीटर तक वर्षा दर्ज न हो जाए, तब तक खेतों में बीज न डालें। ताकि पौधों के जीवित रहने की संभावना बनी रहे।
मौसम आधारित सलाह और आपातकालीन योजना लागू
ठाणे जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बदलते मौसमी चक्र को देखते हुए किसानों के लिए सतर्कता बरतना अनिवार्य है। कृषि विभाग ने डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विश्वविद्यालय द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली मौसम-आधारित गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर में विरोध प्रदर्शन के बाद कॉकरोचों ने खुद साफ किया कचरा, सफाई देख मुरीद हुए लोग; देखें VIDEO
वर्धा के तलेगांव ग्राम पंचायत में वार्डवार आरक्षण का हुआ ऐलान, महिलाओं की भागीदारी में आया बदलाव
स्थायी पद है खाली फिर भी BMC ने निकाली कॉन्ट्रैक्ट भर्ती, जानें कितनी मिलेगी सैलरी और कबतक कर सकेंगे आवेदन
मानसून से पहले वर्धा प्रशासन ने शुरू की तैयारियां, 24 घंटे एक्टिव रहेगी क्विक रिस्पॉन्स टीमें
इसके साथ ही, देर से आने वाले मानसून के प्रतिकूल प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए कृषि विभाग ने एक आपातकालीन फसल योजना मॉडल भी सक्रिय कर दिया है, ताकि संकट की स्थिति में फसलों को बचाया जा सके।
कम पानी में तैयार होने वाली धान की किस्मों पर जोर
सूखे जैसी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सरकार और विशेषज्ञों ने पारंपरिक तरीकों में बदलाव की वकालत की है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे धान की ऐसी उन्नत किस्मों का चयन करें जो जल्दी तैयार हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त, नर्सरी स्तर पर पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एक विशेष तकनीक सुझाई गई है। परामर्श के मुताबिक, धान की नर्सरी में एक प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव किया जाना चाहिए। इससे पौधों में पानी की कमी और सूखे को सहन करने की आंतरिक क्षमता विकसित होती है।
यह भी पढ़ें:- ऑपरेशन टाइगर की तारीख का हुआ ऐलान! शिवसेना नेता प्रमोद नाना भानगिरे के ‘वेट एंड वॉच’ पोस्टर से मची खलबली
महाराष्ट्र में जून महीने में अब तक केवल 26% वर्षा
आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल महाराष्ट्र में मानसून की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। जून के पहले पखवाड़े यानी 15 दिनों में राज्य के भीतर सामान्य के मुकाबले महज 26 प्रतिशत ही बारिश दर्ज की गई है। पानी की इसी भारी किल्लत को देखते हुए राज्य सरकार और ठाणे प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।
