महाराष्ट्र मैरीटाइम कॉरपोरेशन के माध्यम से जल्द शुरू होगा ठाणे जिला जल यातायात का काम
- Written By: Virendra Mishra
ठाणे : ठाणे-डोंबिवली और वसई शहरों को जल यातयात (Water Traffic) के माध्यम से जोड़ने की सागरमाला परियोजना (Sagarmala Project) प्रस्तावित है। इस परियोजना को महाराष्ट्र मैरिटाइम बोर्ड (Maharashtra Maritime Board) अनुसार विभिन्न प्रधाकरणों की अनुमति मिल चुकी है। अब जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा। इस परियोजना के पूर्ण होने से इन शहरों के बीच की दूरी कम हो जाएगी और शहर समीप आ जाएंगे।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार (Central Government) ने आठ साल पहले सड़कों (Roads) और रेलवे (Railways) पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए जल परिवहन को प्राथमिकता देने का फैसला किया था। इसके तहत महाराष्ट्र मैरीटाइम कॉरपोरेशन (Maharashtra Maritime Corporation) द्वारा प्रस्तुत कल्याण-वसई जलमार्ग के प्रस्ताव को हाल ही में महाराष्ट्र मैरीटाइम एरिया मैनेजमेंट अथॉरिटी की बैठक में मंजूरी दी गई। परियोजना के तहत डोंबिवली, ठाणे, मीरा भायंदर से वसई क्षेत्रों को जल परिवहन से जोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार मरीन कॉर्पोरेशन ने जल विशेषज्ञों की मदद से कल्याण-वसई जलमार्ग की विस्तृत परियोजना प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव अनुसार महाराष्ट्र तटीय प्रबंधन प्राधिकरण, तटीय नियम विभाग से आवश्यक मंजूरी मिल गई है। अब जमीनी कार्य शुरू करना है। जल्द ही कार्य शुरुवात कर दी जाएगी।
शिवसेना सांसद राजन विचारे ने बताया कि यात्रियों को एक उचित पर्याय की आवश्यकता है। इसी के तहत इस परियोजना को हरी झंडी मिल चुकी है। अब जल्द महाराष्ट्र मैरिटाइम बोर्ड कार्य की शुरुवात करेगी।
सम्बंधित ख़बरें
मीरारोड को मिली नई धार्मिक पहचान, जरीमरी झील पर स्थापित हुई 51 फीट ऊंची भगवान विट्ठल की प्रतिमा
Mira Road: बिना एक्सीडेंट अचानक खुला कार का एयरबैग, 25 साल के युवक की मौत, बैठे-बैठे घुट गया दम
प्रताप सरनाईक का ऐलान; महाराष्ट्र में अवैध यात्री परिवहन के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई, चलेंगी 8,300 नई बसें
तुर्भे और कोपरखैरने के बीच धंसी पटरी के नीचे की जमीन, ट्रांस हार्बर लोकल ट्रेन सेवा बारिश की वजह से प्रभावित
विभिन्न कार्यों को मिलेगी गति
कोलशेत (ठाणे), जैसल पार्क (मीरा-भायंदर), जेट्टी, स्टेशन भवन, पार्किंग स्थल का निर्माण किया जाएगा। प्राधिकरण ने जल परिवहन के लिए पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का उपयोग करने और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे इस प्रकार काम करने का निर्देश दिया है।
