नवी मुंबई में उप-राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान 12 अक्टूबर से, 88,748 बच्चों को मिलेगी सुरक्षा खुराक

Thane News: नवी मुंबई में 12 अक्टूबर को उप-राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान शुरू होगा। जिसमें 0-5 साल के 88,748 बच्चों को खुराक देने के लिए 721 बूथ और 902 टीमें घर-घर जाएंगी।
नवी मुंबई पोलियो अभियान (pic credit; social media)
नवी मुंबई पोलियो अभियान (pic credit; social media)
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Navi Mumbai Polio Campaign: नवी मुंबई महानगरपालिका ने 12 अक्टूबर से उप-राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस अभियान का लक्ष्य 0 से 5 वर्ष की आयु के अनुमानित 88,748 बच्चों को पोलियो की खुराक देना है। मनपा आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान की विस्तृत योजना बनाई है।

इस योजना के तहत नवी मुंबई मनपा के 26 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 618 स्थायी बूथ स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा 76 ट्रांजिट और 27 मोबाइल बूथ भी बनाए जाएंगे, ताकि शहर के भीड़-भाड़ वाले स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन, मॉल और बस स्टैंडों पर भी बच्चों को आसानी से खुराक दी जा सके।

मनपा चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत जावदे की अध्यक्षता में सिटी टास्क फोर्स समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें अभियान की कार्ययोजना और बूथों पर तैनात टीमों की जिम्मेदारी का निर्धारण किया गया। इस अभियान के लिए चिकित्सा अधिकारियों, एनएम, एलएचवी, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

घर-घर जाकर खुराक देने के लिए 902 टीमों का गठन किया गया है। यदि किसी बच्चे को 12 अक्टूबर को खुराक नहीं दी जा पाई, तो इन टीमों द्वारा अगले पांच दिनों तक घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक टीम के लिए कार्य क्षेत्र के अनुसार विस्तृत योजना बनाई गई है, ताकि कोई भी बच्चा इस अभियान से छूट न जाए।

मनपा ने शहर में जागरूकता बढ़ाने के लिए पोस्टर, बैनर और स्थानीय प्रचार का भी आयोजन किया है। डॉ. कैलाश शिंदे ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को समय पर पोलियो खुराक जरूर दें और स्वास्थ्य अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करें।

पुलिस और नगरसेवक भी इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं। उनका उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना और पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से उन्हें सुरक्षित रखना है। नवी मुंबई में यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि प्रशासन और नागरिकों के संयुक्त प्रयास का उदाहरण भी है।

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