

Maharashtra Teachers Training 11 Districts: महाराष्ट्र के 11 जिलों के 13,355 स्कूलों में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के लिए 40,065 शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को ‘स्कूल हेल्थ प्रोग्राम’ का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह प्रशिक्षण 21 से 24 सितंबर तक ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के आयुष्मान भारत अभियान के तहत चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत चयनित स्कूलों में ‘आरोग्य वर्धिनी’ की व्यवस्था विकसित की जाएगी। प्रत्येक पात्र स्कूल से तीन लोगों को प्रशिक्षण के लिए चुना गया है।
इनमें प्रधानाध्यापक, एक पुरुष शिक्षक और एक महिला शिक्षक शामिल हैं। प्रशिक्षण से संबंधित सामग्री पहले ही सभी 40,065 प्रशिक्षणार्थियों को उपलब्ध करा दी गई है। अब उन्हें ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह कार्यक्रम केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और केंद्रीय स्कूल शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से संचालित हो रहा है। इसके तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। महाराष्ट्र में कार्यक्रम को राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
जिन 11 जिलों में यह प्रशिक्षण होगा, उनमें ठाणे जिला, जालना, पालघर, नासिक, यवतमाल, हिंगोली, अहिल्यानगर, रायगढ़, परभणी, लातूर और वर्धा शामिल हैं। प्रशिक्षणार्थियों को 21 सितंबर को सुबह 10 बजे तक पूर्व परीक्षा पूरी करनी होगी। उन्हें प्रत्येक ऑनलाइन सत्र में शामिल होने और निर्धारित समय से 15 मिनट पहले जुड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
24 सितंबर को प्रशिक्षण के अंत में बाद की परीक्षा आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों को विद्यार्थियों के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों की जानकारी देकर स्कूल स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
‘स्कूल हेल्थ प्रोग्राम’ के तहत महाराष्ट्र के 11 जिलों के 40,000 से अधिक शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण एक अत्यंत सराहनीय और दूरदर्शी पहल है। आयुष्मान भारत अभियान के अंतर्गत शिक्षा के साथ विद्यार्थियों की सेहत को जोड़ना बाल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिक्षकों को आरोग्य वर्धिनी के रूप में तैयार करने से स्कूल स्तर पर ही स्वास्थ्य जागरूकता मजबूत होगी और बच्चों को शारीरिक व मानसिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।