

Mira Bhayandar Development Projects: मीरा-भाईंदर शहर के नियोजित विकास को केंद्र सरकार के नमक (साल्ट) विभाग की लालफीताशाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। नमक विभाग की 81.42 हेक्टेयर (8,14,172 वर्ग मीटर) जमीन पर प्रस्तावित सड़क, स्टेडियम, बस डिपो, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और उद्यान जैसी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं जमीन हस्तांतरण के अभाव में लंबित हैं। मनपा प्रशासन के अनुसार, इन परियोजनाओं में देरी से करीब 87 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
बता दें कि शहर की बढ़ती आबादी और विस्तार को देखते हुए मनपा प्रशासन ने विकास योजना में नमक विभाग की जमीन को विभिन्न सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित किया है। हालांकि, परियोजनाओं का प्रत्यक्ष काम शुरू करने के लिए संबंधित जमीन मनपा के कब्जे में आना जरूरी है। केंद्र सरकार की 2024 की नीति के तहत मनपा प्रशासन ने राज्य सरकार के नगर विकास विभाग के माध्यम से 28 अक्टूबर 2025 को आवश्यक गारंटी और प्रमाणित दस्तावेजों के साथ 13 भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव केंद्र को भेजे थे। केंद्र द्वारा मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए हैं, लेकिन अब तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
ठाणे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के सांसद नरेश म्हस्के ने केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सॉल्ट विभाग (नमक विभाग) की जमीनों को विकास कार्यों के लिए मीरा-भाईंदर मनपा को हस्तांतरित करने के संबंध में सितंबर 2024 में संसद के शून्य काल और नियम 377 के आधार पर आवाज उठाई थी। उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से भी इस संबंध में पत्र व्यवहार किया था, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।
लंबित प्रस्तावों में मीरा रोड को पूर्व-पश्चिम से जोड़ने वाला रेलवे फ्लाईओवर और लिंक रोड, मीरा रोड पूर्व में 30 मीटर चौड़ी समानांतर सड़क, भाईंदर स्टेशन क्षेत्र में 30 और 18 मीटर चौड़ी सड़कें, घोड़बंदर-जैसलपार्क के बीच 60, 30 और 18 मीटर चौड़ी सड़कें तथा डोंगरी-कुंभरडी-खोपरा सड़क शामिल हैं। इसके अलावा भाईंदर पश्चिम आरक्षण क्रमांक 91 का स्टेडियम, आरक्षण क्रमांक 57 का बस डिपो, भाईंदर पश्चिम की सीवेज परियोजना और विभिन्न वार्डों के सार्वजनिक उद्यान भी प्रभावित हैं। उत्तन चौक-जंजीरे स्थित धारावी किला क्षेत्र तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस मैदान के पीछे से डोंगरी तक प्रस्तावित 30 मीटर चौड़ी सड़क का काम भी जमीन हस्तांतरण के कारण लंबित है। वहीं, नमक विभाग की जमीन पर स्थित झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास का अलग प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए उपायुक्त (नमक) को भेजा गया है।
MBMC शहर अभियंता दीपक ख़ांबित ने कहा कि मनपा ने सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाणित गारंटी प्रमाणपत्र के साथ भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिए हैं। शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए इन बुनियादी सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता है। केंद्र सरकार को जल्द निर्णय लेकर जमीन मीरा - भाईंदर मनपा को हस्तांतरित करनी चाहिए, ताकि वर्षों से अटकी महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को गति दी जा सके।
(इनपुट: विनोद मिश्रा )