मतभेदों का सम्मान करें पर सद्भाव से रहें, RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- किसी को दबाया नहीं जाना चाहिए
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भिवंडी शहर के एक कॉलेज में गणतंत्र दिवस समारोह में पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि मतभेदों का सम्मान किया जाना चाहिए और सद्भाव से रहना चाहिए...
- Written By: आकाश मसने
RSS प्रमुख मोहन भागवत (सोर्स: सोशल मीडिया)
ठाणे: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भिवंडी शहर के एक कॉलेज में गणतंत्र दिवस समारोह में पहुंचे। यहां उन्होंने तिरंगा फहराने के बाद कहा कि गणतंत्र दिवस एक उत्सव के साथ-साथ ‘राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद करने का अवसर भी है।
रविवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि मतभेदों का सम्मान किया जाना चाहिए और एकजुटता सद्भाव से रहने की कुंजी है। उन्होंने कहा कि किसी को दबाया नहीं जाना चाहिए और सभी को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। भागवत ने विविधता के संदर्भ में कहा कि मतभेदों का सम्मान किया जाना चाहिए और सद्भाव से रहने की कुंजी एकजुटता है।
बिना सोचे-समझे किए काम का फल नहीं मिलता
भागवत ने कहा कि ‘उद्यमशील होना महत्वपूर्ण है, लेकिन आपको हमेशा ज्ञान के साथ अपना काम करना चाहिए। बिना सोचे-समझे किए गए किसी भी काम का फल नहीं मिलता बल्कि ऐसा काम परेशानी पैदा करता है। उन्होंने ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए चावल पकाने की तुलना किसी भी काम में ज्ञान की आवश्यकता से की।
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उन्होंने कहा कि अगर आप चावल पकाना जानते हैं, तो आपको पानी, गर्मी और चावल की जरूरत होगी। लेकिन अगर आप नहीं जानते कि इसे कैसे पकाना है और इसके बजाय आप सूखे चावल खाते हैं, पानी पीते हैं और घंटों धूप में खड़े रहते हैं, तो यह भोजन नहीं बन पाएगा। ज्ञान और समर्पण जरूरी हैं।
रोजमर्रा की जिंदगी में भरोसे और समर्पण के महत्व बताया
संघ प्रमुख भागवत ने रोजमर्रा की जिंदगी में भरोसे और समर्पण के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर आप किसी होटल में पानी पीते हैं और चले जाते हैं, तो आपको अपमानित होना पड़ सकता है या नीचा दिखाने वाली निगाहों से देखा जा सकता है। लेकिन अगर आप किसी के घर में पानी मांगते हैं, तो आपको किसी खाद्य वस्तु के साथ एक जग भर कर पानी दिया जाता है। क्या अंतर है? घर में भरोसा और समर्पण होता है। ऐसे काम का फल मिलता है।
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आरएसएस प्रमुख ने व्यक्ति और राष्ट्र के विकास के लिए समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के महत्व पर भी बल दिया और राष्ट्रीय ध्वज पर ‘धम्मचक्र’ (धर्म का पहिया) के प्रतीकात्मक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वैयक्तिकता के प्रति सम्मान और दमन से मुक्ति के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
